काले चमड़े की जैकेट वाला शख्स सच में बहुत डरावना लग रहा था। वह ज़ॉम्बी को खिलौनों की तरह अपने कंट्रोल में कर रहा था। जब गेट टूटा तो सस्पेंस अपने चरम पर था। नेटशॉर्ट ऐप पर यह देखना काफी इंटेंस अनुभव रहा। मैं आखरी सेवर हूं की कहानी में हर मोड़ पर नया मोड़ मिलता है जो आपको बांधे रखता है। एक्शन और डर का बेहतरीन मिश्रण है यह।
फीमेल कमांडर की आंखों में जो गुस्सा था वह साफ तौर पर दिख रहा था। उसने पूरी कोशिश की लेकिन विशाल ज़ॉम्बी के आगे सब बेबस थे। उसका घायल होना दिल को छू गया। मैं आखरी सेवर हूं में किसी के साथ भी रियायत नहीं बरती जाती। हर पल मौत सामने खड़ी रहती है जो दर्शकों को बांधे रखती है। बचाव की उम्मीद कम ही दिखाई देती है।
ग्रे बालों वाले सैनिक का लेटर पढ़ना सबसे दुखद पल था। उसे अहसास हुआ कि उसने क्या खो दिया है। ट्रक से कूदना उसकी मजबूरी दिखाता है। मैं आखरी सेवर हूं इमोशनल लेवल पर भी काफी असरदार है। पछतावे और उम्मीद के बीच की यह लड़ाई देखने लायक है। दर्शक भी रो पड़ते हैं यह देखकर। परिवार की यादें ताज़ा हो गईं।
एक्शन सीक्वेंस बहुत ही शानदार हैं। गोलियां चलना और ज़ॉम्बी का टूटकर आना सिनेमाई लग रहा था। ध्वनि व्यवस्था भी जबरदस्त होगी। मैं आखरी सेवर हूं देखते वक्त मैं सीट के किनारे बैठा रहा। हर सीन में नई ऊर्जा और खतरा महसूस होता है जो बोर नहीं होने देता। रोमांच बना रहता है।
उसने उन्हें गोली क्यों चलाई? बचने वालों के बीच कन्फ्यूजन साफ दिख रहा था। इस दुनिया में भरोसा मिलना मुश्किल है। मैं आखरी सेवर हूं की कहानी काफी डार्क और गंभीर है। इंसानियत बचाने की जंग में कौन सही है यह कहना मुश्किल हो जाता है देखकर। नैतिकता सवाल खड़े करती है।
वीरान शहर का बैकग्राउंड मूड को परफेक्ट बनाता है। धूल, खंडहर और बेशुमार ज़ॉम्बी। यह बहुत ही निराशाजनक लगता है फिर भी आकर्षक है। मैं आखरी सेवर हूं तबाही के माहौल को बहुत अच्छे से कैप्चर करता है। दृश्य कथा में दम है जो बिना कहे सब बता देता है। सेटिंग बहुत प्रभावशाली है।
वह विशाल ज़ॉम्बी जब गेट तोड़कर आया तो नज़ारा भयानक था। सैनिक उसके आगे बहुत छोटे लग रहे थे। उनकी आंखों में खौफ साफ झलक रहा था। मैं आखरी सेवर हूं खतरे को बहुत ऊपर ले जाता है। हर फ्रेम में खतरे का साया बना रहता है जो डराता भी है। ताकत का अंतर साफ दिखता है।
लेटर वाले सीन ने सब कुछ बदल दिया। ठंडे सैनिक से दुखी पिता का सफर शक्तिशाली था। आंसू मेरी आंखों में भी आ गए थे। मैं आखरी सेवर हूं दिल के तारों को हिलाना जानता है। परिवार और ड्यूटी के बीच का संघर्ष बहुत गहराई से दिखाया गया है इसमें। भावनाएं उमड़ पड़ती हैं।
रफ़्तार बहुत तेज और लगातार है। हमलों के बीच सांस लेने का वक्त नहीं मिलता। जैसे ही सुरक्षा लगती है अराजकता शुरू हो जाती है। नेटशॉर्ट पर लगातार देखना गलती थी क्योंकि रुका नहीं गया। मैं आखरी सेवर हूं काफी लत लगाने वाला है और बारबार देखने को मजबूर करता है। नींद उड़ गई।
ट्रक से कूदना सुधार या मौत की ओर इशारा है। खुला अंत काफी बहादुराना है। मुझे जानना है कि आगे क्या होता है। मैं आखरी सेवर हूं आपको और अधिक जानने के लिए छोड़ देता है। यह सीरीज अपने सस्पेंस के लिए जानी जाएगी। अगले सीजन का इंतज़ार अब और नहीं होगा।
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