जब सड़क पर खून बह रहा था और चीखें गूंज रही थीं, तब बैंगनी शर्ट वाला शख्स आया जैसे मौत का फरिश्ता। उसकी ठंडी मुस्कान और गुलाबी जैकेट वाली लड़की का अहंकार देखकर रोंगटे खड़े हो गए। घायल डॉक्टर की आंखों में बेबसी थी, पर वह हार नहीं मान रही। 30 साल जमी, आपात बचाव का जिक्र आते ही लगा जैसे कोई पुराना राज खुलने वाला है। लाल रोशनी वाला सीन तो जैसे भविष्य का संकेत हो। हर फ्रेम में तनाव, हर डायलॉग में चुनौती। नेटशॉर्ट पर ऐसे थ्रिलर देखने का मजा ही अलग है।