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Chhupa Rakshak

Hazaar saal purana mahaatma Aditya Singh, pagal damaad bankar Tara Sharma ke ghar rehta hai. Rajesh Sharma ki farmaish par woh teen aatmao ka raksha ghera banata hai. Tara uska mazak udati hai. Teen saal baad Tara galti se wo nishaaniyaan tod deti hai, khatra badh jaata hai. Aditya ki poori shakti wapas aati hai, aur woh ghar chhodkar jaane ka faisla karta hai. Tara ko baad mein pata chalta hai ki Aditya kaun tha. Kya Tara ko apni galti ka ehsaas hoga?
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इस एपिसोड की समीक्षा

गुस्से का असली चेहरा

बूढ़े आदमी की डांट देखकर रोंगटे खड़े हो गए। युवक की घबराहट साफ दिख रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा राज छिपा हो। छुपा रक्षक में ऐसे नाटकीय मोड़ देखना बहुत रोमांचक है। हर डायलॉग में तनाव था। माहौल इतना भारी था कि सांस लेना मुश्किल हो रहा था। शक्ति का दुरुपयोग साफ झलक रहा था इस सीन में।

रहस्यमयी कमरे की तलाश

महिला ने जब दराज खोला तो माहौल बदल गया। वो फाइल क्या थी? बुजुर्ग महिला ने क्यों रोका? रहस्य बना हुआ है। छुपा रक्षक की कहानी में ये जासूसी अंदाज बहुत पसंद आया। हर पल नया खुलासा हो रहा है। दर्शक को बांधे रखने के लिए ये सही तरीका है। रहस्य धीरे धीरे खुल रहा है।

सफेद सूट में नया अवतार

वही लड़का अब सफेद सूट में बिल्कुल अलग लग रहा था। आत्मविश्वास बदल गया है। लग्जरी अपार्टमेंट का सीन बहुत शानदार था। छुपा रक्षक में किरदारों का विकास बहुत तेजी से हो रहा है। देखने में मजा आ रहा है। कपड़ों का बदलाव भी कहानी का हिस्सा लग रहा था। नया रूप नई ऊर्जा दे रहा था।

गिरती हुई तस्वीर का राज

जब वो किताब गिरी और फोटो बाहर आई, तो सबकी सांसें रुक गईं। ये सबूत किसके खिलाफ है? महिला की आंखों में डर साफ था। छुपा रक्षक में ऐसे छोटे विवरण बहुत बड़ा असर डालते हैं। कहानी गहराती जा रही है। जमीन पर गिरा वो कागज सब कुछ बदल सकता था। बहुत ही नाजुक पल था ये।

परिवार का कड़वा सच

दोनों महिलाओं के बीच की ठंडी जंग देखने लायक थी। सफेद फर वाली महिला की चालाकी समझ नहीं आ रही। युवक चुप क्यों है? छुपा रक्षक में रिश्तों की ये उलझन बहुत असली लगती है। हर कोई कुछ छिपा रहा है। परिवार के भीतर की ये लड़ाई बहुत दर्दनाक लग रही थी सबको।

भावनाओं का खेल

शुरुआत में डांट और अंत में सभा। कहानी का बहाव बहुत अच्छा है। पुराने जमाने का कमरा और नया घर, दोनों का अंतर अच्छा है। छुपा रक्षक में दृश्य कथा कहना बहुत मजबूत है। बिना बोले सब समझ आ जाता है। मंच सजावट भी कहानी कह रहा था। समय के बदलाव को अच्छे से दिखाया।

खलनायक की एंट्री

तीसरे व्यक्ति के प्रवेश ने माहौल और खराब कर दिया। वो क्यों हंस रहा था? साजिश साफ दिख रही थी। छुपा रक्षक में खलनायक का अंदाज बहुत खतरनाक लग रहा है। आगे क्या होगा ये जानने की उत्सुकता है। उसकी आंखों में चालाकी साफ झलक रही थी। खतरे की घंटी बज रही थी।

अभिनय की बारीकियां

युवक की आंखों में डर और फिर गुस्सा। अभिनय बहुत स्वाभाविक है। महिला की चुप्पी सब कुछ कह रही थी। छुपा रक्षक में कलाकारों ने जान डाल दी है। हर भाव मायने रखता है। देखने वाले को बांधे रखता है। चेहरे के भाव बदलते रहना बहुत अच्छा लगा। असली दर्द दिखाई दिया।

लग्जरी और संघर्ष

बड़े कांच के खिड़कियों वाला घर बहुत अमीराना था। लेकिन वहां भी सुकून नहीं था। पैसा होने से सब ठीक नहीं होता। छुपा रक्षक में अमीर परिवार की काली करतूतें दिखाई गई हैं। समाज का आईना है ये। दीवारें भी चुप नहीं थीं वहां। अमीरी के पीछे का सच कड़वा था।

अगले भाग का इंतजार

कहानी बीच में ही रुक गई है। वो फाइल किसने रखी थी? युवक का असली रूप क्या है? छुपा रक्षक का अगला भाग देखने के लिए मैं बेताब हूं। ऐसी रुकावट बहुत पसंद हैं। जल्दी आना चाहिए नया भाग। अधूरी कहानी दिल में खटक रही है। सबका अंजाम जानना जरूरी है।