शुरू में जब वह नीले पेंडेंट को पकड़ता है तो लगता है कि सब कुछ सामान्य है। चेहरे पर मुस्कान है, लेकिन आंखों में कुछ और ही चमक है। ओवरऑल्स वाला अरबपति में यह दृश्य बहुत महत्वपूर्ण है। ज्वेलरी स्टोर की रोशनी और फिर अचानक बदलता माहौल देखकर हैरानी हुई। जब वह दुकान से बाहर निकलता है तो रास्ता बदल जाता है। बेकरी में गिरना और फिर गोदाम में बंधना दिखाता है कि यह कोई साधारण दिन नहीं था। हर फ्रेम में संदेह बढ़ता गया। दर्शक के रूप में यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई कि आखिर हुआ क्या।
अंधेरे गोदाम में कुर्सी से बंधा हुआ देखकर रोंगटे खड़े हो गए। सामने खड़ा शख्स सिगरेट के धुएं से खेल रहा था। ओवरऑल्स वाला अरबपति की कहानी में यह ट्विस्ट बहुत गहरा था। जब जलती हुई सिगरेट कपड़े को छूती है तो दर्द साफ झलकता है। पसीने से तरबतर चेहरा और चीखें बता रही थीं कि यह कोई मजाक नहीं है। सस्पेंस बना हुआ है कि आखिर यह सब क्यों हो रहा है। माहौल बहुत भारी और डरावना लगा। कोई मदद के लिए नहीं आया।
जब मुक्का पड़ता है और खून की बूंदें गिरती हैं, तो सन्नाटा छा जाता है। फर्श पर गिरा हुआ दांत देखकर दिल दहल गया। ओवरऑल्स वाला अरबपति में हिंसा का यह रूप बहुत कच्चा और असली लगा। बंधे हुए व्यक्ति की आंखों में डर और गुस्सा दोनों साफ दिख रहे थे। सामने खड़े व्यक्ति के चेहरे पर कोई रहम नहीं था। यह बदले की कहानी लग रही है। हर पल तनाव बढ़ता गया और अंत तक सांस रुक सी गई। बहुत ही तीव्र अनुभव था।
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दांत गिरने के बाद भी कहानी खत्म नहीं हुई लगती। आंखों में अभी भी गुस्सा बाकी है। ओवरऑल्स वाला अरबपति का अगला भाग देखने की बेचैनी बढ़ गई है। यह सिर्फ एक झगड़ा नहीं, बल्कि बड़ी जंग की शुरुआत लग रही है। माहौल में जो सस्पेंस है वह बना हुआ है। हर दृश्य में नया राज खुलता है। यह थ्रिलर बहुत दमदार साबित हुआ है। इंतजार नहीं हो रहा।
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