यह शो कार्रवाई और नाटक का सही मिश्रण है। हर किरदार का अपना महत्व था। सेट रचना भी बहुत यथार्थवादी थी। रक्तरंजित योद्धा को देखने के बाद मन नहीं भर रहा था। अगला भाग कब आएगा, इसका इंतजार है। बहुत बढ़िया काम किया है।
जब नायक ने सभी गुंडों को हराया, तो मजा आ गया। एक के बाद एक सब जमीन पर गिर रहे थे। मुखिया अब भी मुस्कुरा रहा था, शायद उसे कुछ और योजना थी। रक्तरंजित योद्धा का अंत बहुत जोरदार है। महिला की सुरक्षा अब नायक के हाथ में थी।
बिना संवाद के ही आंखों से बातें हो रही थीं। नायक की नफरत और खलनायक का घमंड साफ दिख रहा था। जब वह चिल्लाया, तो रूह कांप गई। रक्तरंजित योद्धा में अभिनय बहुत स्वाभाविक है। लड़ाई के दृश्य में जो दर्द था, वह असली लग रहा था।
शुरुआत से लेकर अंत तक तनाव बना रहा। कोई भी दृश्य नीरस नहीं था। नायक के भाव बदलते रहना बहुत अच्छा लगा। रक्तरंजित योद्धा की रफ्तार बहुत तेज है। मुखिया की कुर्सी वाला प्रवेश पुराने जमाने के खलनायक वाला था। सब कुछ उत्कृष्ट था। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का अनुभव भी अच्छा रहा।
चमड़े का कोट पहने उस व्यक्ति की आंखों में जो गुस्सा था, वह सच में देखने लायक था। जब उसने मुट्ठी भींची, तो लगा कि अब खून खराबा होने वाला है। सिगार पीता हुआ मुखिया बहुत घमंडी लग रहा था, लेकिन नायक ने सबको सबक सिखाया। रक्तरंजित योद्धा में ऐसे लड़ाई के दृश्य दिल को छू लेते हैं। महिला की चीखें सुनकर रोंगटे खड़े हो गए।
चश्मे वाला खलनायक इतना शांत कैसे बैठ सकता है जब вокруг इतना शोर हो रहा है? उसकी हंसी में एक अजीब सा खतरा था। लगता है उसने सब कुछ योजना बनाई हुई थी। रक्तरंजित योद्धा की कहानी में यह मोड़ बहुत रोमांचक था। तलवार वाला गुंडा भी नहीं रुका, लेकिन नायक का जोश देखते ही बनता था।
लड़ाई की बनावट बहुत तेज थी। पाइप और तलवारों का इस्तेमाल करके जो कार्रवाई दिखाई गई, वह असली लग रही थी। धूल और नीली रोशनी ने माहौल को और डरावना बना दिया। रक्तरंजित योद्धा में हर पल में जोश है। बंधी हुई महिला को देखकर गुस्सा आ रहा था कि कोई उसे बचाए।
बेचारी महिला रस्सियों में बंधी हुई थी और उसकी आंखों में डर साफ दिख रहा था। जब नायक ने वार किया, तो लगा कि अब वह आजाद होगी। खलनायक की क्रूरता की कोई सीमा नहीं थी। रक्तरंजित योद्धा का यह दृश्य बहुत भावुक था। नायक की आंखों में बदले की आग साफ दिख रही थी।
अंधेरी इमारत और नीली रोशनी ने एक सस्पेंस बनाया हुआ था। ऐसा लग रहा था कि कोई बड़ा धमाका होने वाला है। चमड़े वाले कोट वाले नायक का प्रवेश धमाकेदार था। रक्तरंजित योद्धा में ऐसे गहरे दृश्य बहुत पसंद आए। खलनायक की सिगार का धुआं भी कहानी कह रहा था।
मूंछों वाला आदमी तलवार लेकर बहुत खतरनाक लग रहा था। उसकी चालें तेज थीं, लेकिन नायक के आगे उसकी एक नहीं चली। जब वह गिरा, तो लगा कि जीत पक्की है। रक्तरंजित योद्धा में कार्रवाई का स्तर बहुत ऊंचा है। पीछे खड़े गुंडे भी घबरा गए थे।
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