योद्धा की शक्ति देखकर रोंगटे खड़े हो गए। बिजली कड़कती है और वह हवा में उड़ता है। उसका बेटा, उसका पाप में ऐसे सीन कम ही देखने को मिलते हैं। असली ताकवर का रूप देखकर लगता है कि देवताओं का वरदान मिल गया हो। साहसिक दृश्य बहुत जबरदस्त है।
रानी के चेहरे पर खून और आंसू दोनों हैं। पहले वह डरी हुई थी फिर पागलों की तरह हंसने लगी। उसका बेटा, उसका पाप की कहानी में यह मोड़ बहुत हैरान करने वाला था। उसकी आंखों में दर्द साफ दिख रहा था। अभिनय बहुत गहरा है।
वह काला राक्षस जिसके कई सांप के सिर हैं, बहुत डरावना लग रहा था। लाल आंखें और आग उगलना। उसका बेटा, उसका पाप में खलनायक का डिजाइन बहुत भव्य है। जब वह चिल्लाता है तो लगता है सब खत्म हो गया। दृश्य प्रभाव शानदार हैं।
शहर जल रहा है और लोग भाग रहे हैं। तबाही का मंजर दिल दहला देने वाला है। उसका बेटा, उसका पाप में ऐसे विनाश के दृश्य बजट से बड़े लगते हैं। धूल और आग का असली अहसास होता है। देखने वाला हर पल बंधा रहता है।
अंत में जो देवता विशालकाय जीव पर सवार होकर आए, वह सीन जादुई था। सुनहरी बिजली और सफेद कपड़े। उसका बेटा, उसका पाप का अंत बहुत भव्य है। लगता है अच्छाई की जीत होगी। यह दृश्य यादगार बन गया है।
योद्धा जब चिल्लाता है तो उसकी आवाज में दर्द है। वह अकेले उस विशाल दुश्मन से लड़ रहा है। उसका बेटा, उसका पाप में नायक की जुनून देखकर गर्व होता है। उसके घाव और पसीना असली लगते हैं। बहुत भावुक सीन है।
रानी का पागलपन धीरे धीरे बढ़ता है। पहले वह मदद मांगती है फिर खुद ही हंसने लगती है। उसका बेटा, उसका पाप में किरदार की यह बदलाव बहुत अच्छे से दिखाया गया है। खून से सना चेहरा कहानी बताता है। बहुत गहराई है इसमें।
नेटशॉर्ट पर यह कहानी देखना बहुत मजेदार था। हर भाग में नया मोड़ है। उसका बेटा, उसका पाप की रफ्तार बहुत तेज है। बोर होने का मौका नहीं मिलता। साहसिक दृश्य और नाटक का सही संतुलन है। सबको देखना चाहिए।
राक्षस की छाती से निकलती लाल रोशनी बहुत खतरनाक लग रही थी। जैसे उसमें कोई जादुई शक्ति हो। उसका बेटा, उसका पाप में ऐसे जादुई तत्व कहानी को रोचक बनाते हैं। अंधेरा और रोशनी का खेल बहुत अच्छा है।
पूरी कहानी में एक पौराणिक अहसास है। प्राचीन युद्ध और देवताओं का खेल। उसका बेटा, उसका पाप ने मिथक को नए तरीके से पेश किया है। विशालकाय जीव और सांपों का युद्ध देखने लायक है। अंत बहुत संतोषजनक लगा।