उस विशाल पत्थर के नाग की पृष्ठभूमि में जब वह युवक आगे बढ़ा, तो माहौल में बिजली सी कौंध गई। एक मुक्का: महा विनाश में ऐसे दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बैंगनी कपड़ों वाले की घमंडी मुस्कान और सफेद पोशाक वाले का गुस्सा साफ दिख रहा था। भीड़ की सांसें थम गई थीं और सब स्तब्ध थे।
जब उसने वह प्राचीन प्रतीक चिह्न दिखाया, तो सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। एक मुक्का: महा विनाश की कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। उस युवक की आंखों में जीत की चमक साफ दिख रही थी। सामने खड़े योद्धा का चेहरा पीला पड़ गया था। ऐसा लग रहा था कि अब असली खेल शुरू होगा। सब हैरान थे।
उस मैदान में खड़ी भीड़ की चीखें सुनकर लग रहा था कि जैसे ज्वालामुखी फट पड़ा हो। एक मुक्का: महा विनाश में दर्शकों का यह उत्साह देखने लायक था। लाल पट्टी वाले युवक ने जब उंगली उठाई, तो सबका जोश सातवें आसमान पर पहुंच गया। यह सिर्फ एक लड़ाई नहीं, जज्बातों का खेल था। सब चिल्ला रहे थे।
बैंगनी पोशाक वाले ने जब अपनी तलवार निकाली, तो हवा में ठंडक दौड़ गई। एक मुक्का: महा विनाश के इस सीन में तनाव चरम पर था। उसकी पकड़ मजबूत थी और निशाना सीधा दिल पर था। सामने वाले ने भी पीछे हटने से इनकार कर दिया। अब देखना यह है कि वार कौन करता है। मौत सामने थी।
सफेद कपड़ों वाले युवक के चेहरे पर जब गुस्सा उबल आया, तो लगा कि अब वह नहीं रुकेगा। एक मुक्का: महा विनाश में उसकी आंखों की चमक ने सब बता दिया। उसने नफरत को ताकत में बदल लिया था। सामने खड़े व्यक्ति की हंसी अब गंभीरता में बदल चुकी थी। यह टकराव बहुत खतरनाक होने वाला है। सब डर गए।
सूरज ढल रहा था और आसमान में लाली छा गई थी, बिल्कुल वैसे ही जैसे मैदान में खून बहने वाला हो। एक मुक्का: महा विनाश का यह दृश्य बहुत ही खूबसूरत और डरावना था। पहाड़ों की चोटियों पर बादल गरज रहे थे। दोनों योद्धाओं के बीच की दूरी कम होती जा रही थी। मौत का साया मंडरा रहा था। सब कांप रहे थे।
शब्दों की जरूरत नहीं थी, बस उनकी आंखें सब कह रही थीं। एक मुक्का: महा विनाश में संवाद से ज्यादा यह चुप्पी भारी थी। बैंगनी वाले की मुस्कान में छिपा खतरा और सफेद वाले की आंखों में आग। हर कोई इस नतीजे का इंतजार कर रहा था कि अंत कौन बाजी मारेगा। सस्पेंस बना हुआ था। सब देख रहे थे।
जैसे ही वह आगे बढ़ा, लग रहा था कि समय थम गया हो। एक मुक्का: महा विनाश के कार्रवाई के दृश्य बहुत तेज और दिलचस्प हैं। उस युवक की चाल में एक अलग ही आत्मविश्वास था। भीड़ में खड़े लोग भी अपनी सांसें रोके हुए थे। यह मुकाबला इतिहास रचने वाला साबित होगा। बहुत ही शानदार दृश्य था। सभी दंग रह गए।
उस तांबे के टुकड़े पर लिखे अक्षरों में कोई जादू था। एक मुक्का: महा विनाश में इस वस्तु का महत्व बहुत गहरा है। जब उसने उसे ऊपर उठाया, तो सूरज की रोशनी उस पर चमक रही थी। ऐसा लगा कि कोई देवता साक्षी बन रहा हो। अब खेल के नियम बदलने वाले हैं। सब हैरान थे। जादू था उसमें।
यह सिर्फ एक झगड़ा नहीं, बल्कि दो विचारों का टकराव था। एक मुक्का: महा विनाश की कहानी यहां से नया मोड़ लेती है। पीछे खड़ा विशाल नाग सब देख रहा था। दोनों तरफ ताकतवर लोग खड़े थे। अब जो होगा, वह सिर्फ तलवारों से नहीं, इरादों से तय होगा। बहुत ही रोमांचक अंत है। सब चौंक गए।