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कॉल जारी है

प्रिया जोशी सालों से जबरन गूंगी बनकर जीती रही। एक अपहरण में उसे गलतफहमी हो जाती है कि ईशान चौहान उसके पेट में पल रहे बच्चे को नहीं चाहता। बच्चे को बचाने के लिए वह फोन पर अपहरणकर्ता बनकर ईशान चौहान से सौदेबाज़ी करती है। हर कॉल के साथ सच सामने आता है, गलतफहमियाँ टूटती हैं और ईशान उसे अपनी असली आवाज़ लौटाने की हिम्मत देता है… पर आख़िरी कॉल में किसका राज़ खुलने वाला है?
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इस एपिसोड की समीक्षा

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पुरानी चोटें फिर खुल गईं

तीन साल पहले की यह झलक देखकर रोंगटे खड़े हो गए। सास ने बहू का हाथ पकड़कर जो जबरदस्ती की, वह किसी अभिशाप से कम नहीं लग रही थी। पन्ना जैसा कंगन अब बोझ बन चुका है। कॉल जारी है की कहानी में यह मोड़ बहुत अहम है। लड़की की बेबसी और माँ का गुस्सा दोनों ही दिल को छू लेते हैं। ऐसा लगता है कि परिवार की इज्जत के नाम पर एक जीवन कुर्बान किया जा रहा है। यह दृश्य बहुत भारी है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है।

आंखों में छुपा दर्द

अभिनेत्री की आंखों में जो नमी है, वह बिना बोले सब कह रही है। सफेद कार्डिगन पहनी लड़की कितनी मासूम लग रही है, जबकि सामने खड़ी महिला कितनी सख्त दिख रही हैं। कॉल जारी है में ऐसे परिवारिक कलह को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। जब वह घुटनों पर गिरने वाली होती है, तो लगता है कि अब सब खत्म हो गया। यह नाटक नहीं, हकीकत लग रहा है। देखकर बहुत बुरा लगा और दिल पर गहरी चोट लगी।

कंगन का राज़

उस हरे कंगन ने सब कुछ बदल दिया। शायद यही वह तोहफा था जिसने रिश्तों में दरार डाल दी। कॉल जारी है के इस एपिसोड में तनाव चरम पर है। माँ बेटी को समझा रही हैं या धमका रही हैं, यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन जो डर लड़की के चेहरे पर है, वह साफ दिखाई दे रहा है। कमरे की सजावट बहुत अमीराना है, फिर भी खुशियां नहीं हैं। धन के पीछे भागते हुए रिश्ते टूट रहे हैं और दर्द बढ़ रहा है।

वर्तमान और भूतकाल

पहले दो लड़कियां बात कर रही थीं, फिर अचानक पुरानी यादें ताजा हो गईं। यह फ्लैशबैक बहुत प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है। कॉल जारी है की पटकथा में समय का खेल बहुत अच्छा है। नारंगी कोट वाली महिला का गुस्सा आज भी उतना ही तेज है। लगता है कि तीन साल बाद भी वह सब कुछ वैसा ही है। कोई नहीं बदला, बस दर्द गहरा हो गया है। यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

माँ का दबाव

एक माँ का अपने बच्चे पर इतना दबाव डालना देखकर हैरानी होती है। क्या मजबूरी है या जिद, यह समझ नहीं आ रहा। कॉल जारी है में दिखाए गए इस संवाद में बहुत गहराई है। लड़की चुपचाप सब सह रही है, जैसे उसने हार मान ली हो। कमरे की खामोशी शोर मचा रही है। ऐसे में कोई सहारा देने वाला नहीं दिख रहा। परिवार के बंधन कभी-कभी पिंजरे बन जाते हैं। बहुत ही भावुक दृश्य है जो रूला देता है।

आंसुओं की कीमत

जब वह लड़की रोने लगी, तो स्क्रीन देखने वालों की आंखें भी नम हो गईं। कॉल जारी है के इस सीन में भावनाओं का सही इस्तेमाल हुआ है। सास का व्यवहार थोड़ा कठोर लग रहा है, लेकिन शायद उनके पास कोई और रास्ता नहीं है। जीवन में कभी-कभी कड़वे फैसले लेने पड़ते हैं। लड़की की चुप्पी सबसे बड़ा शोर है। यह दृश्य लंबे समय तक याद रहेगा। बहुत ही दमदार एक्टिंग देखने को मिली है।

सजावट और असलीयत

कमरा कितना सुंदर है, झूमर और सोफे सब कुछ महंगा लग रहा है। लेकिन इन चीजों के बीच इंसानियत दब गई है। कॉल जारी है में दिखाया गया यह विरोधाभास बहुत गहरा है। अमीरी के बीच भी गरीबी दिख रही है, सुकून की गरीबी। लड़की के कपड़े सादे हैं, पर दिल भारी है। माँ के कपड़े रंगीन हैं, पर चेहरे पर चिंता है। बाहर से सब ठीक, अंदर से सब खोखला लग रहा है। यह दृश्य समाज का आईना है।

बातचीत का अभाव

दोनों के बीच चीखने की जरूरत नहीं थी, बस शांति से बात हो सकती थी। कॉल जारी है में यही कमी दिखाई देती है। लोग सुनना नहीं, बस अपना गुस्सा निकालना चाहते हैं। लड़की के हाथ पकड़ना और धक्का देना सही नहीं लगा। हिंसा चाहे शब्दों की हो या हाथों की, दर्द देती है। उम्मीद है कि आगे की कहानी में सुलह होगी। अभी तो बस तनाव ही तनाव दिखाई दे रहा है सब जगह। बातचीत से सब सुलझ सकता था।

तीन साल का फासला

तीन साल पहले का यह वाकया अभी भी ताजा है, इसका मतलब यह घाव कभी भरा नहीं। कॉल जारी है की कहानी में यह पुराना राज अब खुलने वाला है। शायद इसलिए आज की मुलाकात इतनी गंभीर है। दोनों लड़कियां इसी बारे में बात कर रही थीं शायद। पुरानी गलतियां आज भी पीछा नहीं छोड़ रही हैं। समय बीत गया, पर असर बाकी है। यह रहस्य अब सुलझना चाहिए जल्दी। दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

अंत की उम्मीद

इतना सब होने के बाद भी लगता है कि कुछ अच्छा होगा। कॉल जारी है में हमेशा एक उम्मीद की किरण रहती है। लड़की की आंखों में अभी भी हिम्मत बची है। वह चुप नहीं बैठेगी, यह साफ लग रहा है। माँ को भी अपनी गलती का अहसास होगा। परिवार के झगड़े अंत में प्यार से ही सुलझते हैं। बस थोड़ा सब्र की जरूरत है। यह सीरीज देखने लायक है बिल्कुल। हर एपिसोड नया मोड़ लाता है।