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गोस्ट रेसर का जलवावां10एपिसोड

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गोस्ट रेसर का जलवा

पूर्व पर्वत का मैकेनिक चेतन, पिता चंदन के साथ रोज़ पार्ट्स पहुंचाता था। पिता की सीख से उसकी ड्राइविंग देवता जैसी हो गई। जब पूर्व पर्वत ट्रैक MY लीग का ट्रैक बना, तो चेतन की ड्राइविंग ने सबको हैरान कर दिया और वह "गोस्ट रेसर" कहलाने लगा। शांत रफ्तार टीम में आकर उसने हर बार टीम को बचाया। MY में अमीर बिगड़ैल लड़कों ने उसे दबाया, तो पिता चंदन सामने आया, जो असली रेसिंग देवता था। आखिरी रेस में लोकेश के विश्वासघात के बाद, पिता-पुत्र ने मिलकर रेस जीती और देवता की विरासत आगे बढ़ाई।
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इस एपिसोड की समीक्षा

जय वर्मा का दमदार आगमन

जय वर्मा का प्रवेश दृश्य बहुत प्रभावशाली था। रात के अंधेरे में जब उसे वह लिफाफा मिला, तो लगा कुछ बड़ा होने वाला है। गोस्ट रेसर का जलवा देखकर लगता है कि रेसिंग की दुनिया में अब नया खून आएगा। लोकेश यादव की टीम का रवैया थोड़ा अजीब था, पर जय ने हिम्मत नहीं हारी। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी जो बता रही थी कि वह हारने वाला नहीं है। आगे क्या होगा देखना बाकी है।

ओवरऑल वाली टीम का जलवा

भूरे ओवरऑल वाली टीम का समूह काफी मजेदार लग रहा है। लक्ष्य मल्होत्रा की हरकतें थोड़ी चिढ़ाने वाली हैं, पर लगता है टीम वर्क अच्छा है। जिया वर्मा कंटेनर के ऊपर से जो नियंत्रण कर रही हैं, वही असली नेता लगती हैं। गोस्ट रेसर का जलवा में ऐसे संबंध ही तो चाहिए होते हैं। सबकी नजरें उस लिफाफे पर टिकी थीं। उनके कपड़ों का रंग भी उनकी पहचान बन गया है।

जिया वर्मा का रौब

जिया वर्मा का पात्र बहुत प्रभावशाली है। कंटेनर के ऊपर खड़ी होकर जब उसने वह चिट्ठी पढ़ी, तो माहौल गंभीर हो गया। लगता है जय वर्मा की सिफारिश पर उसे संदेह है। गोस्ट रेसर का जलवा की कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। अब देखना है कि वह जय को अवसर देगी या नहीं। नाटक बढ़ता जा रहा है। उसकी आवाज में भी अधिकार था।

विलासिता गाड़ियों की एंट्री

विलासिता वाली गाड़ियों का काफिला जब पहुंचा, तो हवा का रुख बदल गया। सफेद टोपी वाले व्यक्ति के आगमन ने सबकी धड़कनें बढ़ा दीं। लगता है प्रतिद्वंद्वी टीम अब मैदान में उतर आई है। गोस्ट रेसर का जलवा में अब टकराव और तेज हो जाएगा। जय वर्मा के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्या वह इस दबाव को झेल पाएगा? उनकी गाड़ियां बहुत महंगी लग रही थीं।

रहस्यमयी लिफाफा

उस लिफाफे में क्या था जो सबकी नींद उड़ा रहा है? जय वर्मा के हाथ में वह टिकट देखकर लोकेश यादव हैरान रह गया। गोस्ट रेसर का जलवा की कथा में यह कागज का टुकड़ा बहुत अहम भूमिका निभा रहा है। सिफारिश पत्र की ताकत सब जानते हैं। अब जिया वर्मा का फैसला ही सब कुछ तय करेगा। उत्सुकता बढ़ रही है। यह कागज किसी खजाने से कम नहीं था।

ट्रैक का जोशिला माहौल

रेसिंग ट्रैक का वातावरण बहुत ही जोशिला दिखाया गया है। टायर्स के ढेर और रंगीन गाड़ियों ने दृश्य को जिंदा कर दिया। लक्ष्य मल्होत्रा और बाकी टीम का अंदाज काफी फिल्मी है। गोस्ट रेसर का जलवा में दृश्यों पर खासा ध्यान दिया गया है। जय वर्मा की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। आगे की रेस देखने को मन कर रहा है। वहां की धूल भी महसूस हुई।

आंखों की भाषा

जिया वर्मा की आंखों में जो चमक थी, जब उसने जय वर्मा को देखा, वह लापता नहीं थी। लगता है अतीत में कुछ कहानी है। गोस्ट रेसर का जलवा में रिश्तों की यह परत बहुत गहरी लग रही है। सिर्फ रेसिंग नहीं, भावनात्मक पहलू भी मजबूत है। कंटेनर वाला दृश्य बहुत यादगार बन गया। अब चरम सीमा की तरफ बढ़ रहे हैं। उनकी नजरें सब कुछ कह रही थीं।

लोकेश का बदलाव

लोकेश यादव का किरदार थोड़ा हास्यपूर्ण लग रहा था शुरू में, पर बाद में गंभीर हो गया। जब उसने वह चिट्ठी जिया को दी, तो माहौल बदल गया। गोस्ट रेसर का जलवा में हर पात्र की अपनी अहमियत है। जय वर्मा के चेहरे के भाव देखकर लगता है वह कुछ छुपा रहा है। यह रहस्य कब खुलेगा? सब इंतजार कर रहे हैं। उसकी आवाज में बदलाव साफ था।

रंगों का विरोधाभास

सफेद कोट वाले जय वर्मा और भूरे ओवरऑल वाली टीम का विरोधाभास बहुत अच्छा लगा। दृश्य रूप से यह दृश्य बहुत मजबूत था। गोस्ट रेसर का जलवा की छायांकन ने माहौल बनाया। जब वह काली गाड़ी आई, तो लगा अब असली खेल शुरू होगा। जिया वर्मा की स्थिति बहुत ऊंची है, शायद वह निर्णायक है। सबकी सांसें रुकी हुई हैं। रंगों का खेल अच्छा था।

क्लाइमेक्स की ओर

अंत में जब दोनों समूह आमने सामने आए, तो तनाव चरम पर था। बुजुर्ग व्यक्ति की चाल में भी रौब था। जय वर्मा अकेला खड़ा था पर डरा नहीं लग रहा था। गोस्ट रेसर का जलवा का यह भाग बहुत रोमांचक मोड़ पर खत्म हुआ। अब अगले भाग में धमाका होने वाला है। रेसिंग और नाटक का बेहतरीन मिश्रण है। सबकी सांसें थमी हुई थीं।