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छुपी हुई लाड़लीवां59एपिसोड

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छुपी हुई लाड़ली

नायिका राजकुमार द्वारा पाली गई एक अनाथ लड़की थी। सम्राट की पसंद के हिसाब से उसे एक कमजोर खूबसूरत बीमार औरत बना दिया गया। जब वह सम्राट से मिलने महल में गई, तो गलती से घोड़े से गिर पड़ी और नायक की बाहों में जा गिरी – इससे उसकी इज्जत चली गई। नायक ने उसके घर शादी का प्रस्ताव भेजा और उसे अपनी पत्नी बना लिया। लेकिन शादी के तीन सालों तक वह उससे ठंडा रहा, कभी पति-पत्नी वाला संबंध नहीं बनाया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बालकनी का रोमांटिक पल

शुरुआत का दृश्य जहां वे बालकनी में खड़े हैं, वहां की चुप्पी ही सब कुछ कह रही थी। छुपी हुई लाड़ली की कहानी में यह पल बहुत अहमियत रखता है क्योंकि यहीं से उनके रिश्ते की गहराई समझ आती है। पुरुष किरदार की नज़रें जो महिला किरदार पर टिकी हैं, उनमें एक अजीब सी बेचैनी और अपनापन दोनों है। पोशाकें भी कमाल की हैं और रंगों का चुनाव बहुत सही लगा। मुझे यह जोड़ी बहुत पसंद आई है।

लाल जोड़ी का सपना

लाल रंग की शादी की पोशाक में जब वह उसे उठाकर कमरे में ले जाता है, तो वह दृश्य किसी सपने जैसा लग रहा था। छुपी हुई लाड़ली में ऐसे कई पल हैं जो दर्शकों के दिलों को जीत लेते हैं। कमरे में लाल मोमबत्तियां जल रही थीं और माहौल में एक अलग ही गर्माहट थी। उसकी पकड़ में जो मजबूती थी, उससे साफ जाहिर होता है कि वह उसे किसी कीमत पर खोना नहीं चाहता। यह दृश्य देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा।

बच्चे के साथ प्यार

बच्चे के साथ वाला सीन बहुत ही प्यारा था और इसने कहानी में एक नया आयाम जोड़ दिया है। छुपी हुई लाड़ली सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं बल्कि परिवार की जिम्मेदारियों को भी दिखाती है। जब वह बच्चे के सिर पर हाथ रखता है, तो उसके चेहरे पर जो नरमी आती है वह देखने लायक है। यह बताता है कि वह सिर्फ एक प्रेमी ही नहीं बल्कि एक अच्छा पिता भी बन सकता है। ऐसे छोटे छोटे विवरण ही किसी कार्यक्रम को खास बनाते हैं।

आंखों की भाषा

बिस्तर पर बैठकर बातचीत वाला हिस्सा सबसे ज्यादा इमोशनल था। छुपी हुई लाड़ली के इस भाग में संवाद कम थे लेकिन आंखों की भाषा बहुत कुछ कह रही थी। महिला किरदार की शर्मीली मुस्कान और पुरुष किरदार का गहरा देखना किसी भी दर्शक को दीवाना बना सकता है। लाल पर्दों के बीच यह निजी पल बहुत ही खूबसूरती से कैद किया गया है। मुझे लगता है कि इन दोनों के बीच का लगाव ही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत है।

पोशाक की बारीकियां

पोशाक रचना पर जो मेहनत की गई है वह साफ तौर पर पर्दे पर दिखाई देती है। छुपी हुई लाड़ली में हर किरदार के कपड़े उनकी हैसियत और मनोदशा के हिसाब से चुने गए हैं। लाल और सुनहरे रंग का संयोजन शादी के दृश्य में बहुत शाही लग रहा था। जेवर और केश विन्यास भी उस समय के हिसाब से बहुत सटीक थे। ऐसे दृश्य अनुभव मिलना आजकल मुश्किल है और मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई। कला निर्देशन की दाद देनी चाहिए।

अभिनेता की आंखें

अभिनेता की आंखों में जो नमी थी जब वह उसे देख रहा था, वह दिल को छू लेने वाली थी। छुपी हुई लाड़ली में भावनाओं को बिना ज्यादा डायलॉग के दिखाया गया है जो कि एक कला है। उसका चेहरा पढ़कर लग रहा था कि वह अपने अतीत के किसी दर्द से गुजर रहा है लेकिन वर्तमान में उसे सुकून मिल रहा है। ऐसे सूक्ष्म अभिनय को पकड़ना आसान नहीं है और अभिनेता ने इसे बहुत खूबसूरती से निभाया है। मुझे उम्मीद है कि आगे की कहानी में और भी गहराई होगी।

रोशनी का जादू

रोशनी और छाया का खेल इस वीडियो में बहुत ही शानदार तरीके से किया गया है। छुपी हुई लाड़ली के हर फ्रेम को एक पेंटिंग की तरह सजाया गया है। मोमबत्ती की रोशनी में उनके चेहरे जो चमक रहे थे, वह बहुत ही जादुई लग रहा था। यह तकनीकी पहलू कहानी के रोमांस को और भी बढ़ा देता है। दर्शक को ऐसा लगता है कि वह वहीं कमरे में मौजूद है और सब कुछ देख रहा है। ऐसी निर्माण गुणवत्ता के लिए निर्माताओं को बधाई देनी चाहिए।

संतुलित कहानी

कहानी की गति बहुत संतुलित है और कहीं भी बोरियत नहीं होती है। छुपी हुई लाड़ली में हर दृश्य का अपना महत्व है और कुछ भी बेवजह नहीं दिखाया गया है। बालकनी से लेकर शादी के कमरे तक का सफर बहुत ही सहज लगता है। दर्शक को यह नहीं लगता कि समय बर्बाद हो रहा है बल्कि वह हर पल को एंजॉय करता है। मुझे यह लघु श्रृंखला बहुत पसंद आई है और मैं अपने दोस्तों को भी यह जरूर सुझाऊंगी कि वे इसे एक बार जरूर देखें।

नायिका की मुस्कान

महिला किरदार की मासूमियत और उसकी आंखों में छिपा डर बहुत ही असली लग रहा था। छुपी हुई लाड़ली में नायिका का किरदार बहुत मजबूत होने के बावजूद नज़ुक भी दिखाया गया है। जब वह उसे देखकर मुस्कुराती है, तो लगता है कि सारी दुनिया की खुशियां वहीं हैं। उसकी अभिनय क्षमता भी बहुत प्रशंसनीय है और उसने अपने किरदार को बहुत जान डाली है। ऐसे किरदार दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाते हैं और यही इस कार्यक्रम की सफलता का राज है।

आत्माओं का मिलन

अंत में जब वे एक दूसरे के करीब आते हैं, तो सांसों की गर्माहट भी महसूस होती है। छुपी हुई लाड़ली का यह चरम पल बहुत ही इंतज़ार कराता है। लाल फूलों के बीच यह मिलन बहुत ही काव्यात्मक लग रहा था। यह सिर्फ शारीरिक निकटता नहीं बल्कि आत्माओं का मिलन लग रहा था। मुझे यह दृश्य बहुत ही रोमांटिक लगा और मैं इसे बार बार देख सकती हूं। ऐसे पल ही किसी कहानी को यादगार बनाते हैं और यह कार्यक्रम निश्चित रूप से यादगार है।