न्यूज़ स्टूडियो का माहौल देखकर लगता है जैसे दर्द और दिल की कहानी यहीं से शुरू हो रही हो। एंकर की मुस्कान और कैमरे के पीछे की मेहनत दोनों ही दिल को छू लेती हैं। जब वो कागज़ पकड़कर बात करती है तो लगता है सब कुछ प्लान के मुताबिक चल रहा है, पर असली ड्रामा तो अभी बाकी है।
सफेद ब्लेजर में वो लड़की जब हंसती है तो पूरा स्टूडियो रोशन हो जाता है। दर्द और दिल में ऐसे पल ही तो याद रह जाते हैं। उसकी आंखों में चमक और बात करने का अंदाज़ बिल्कुल प्रोफेशनल लगता है। लगता है वो सिर्फ न्यूज़ नहीं, दिलों की खबरें भी पढ़ रही है।
जब हाथ बटन दबाते हैं और स्क्रीन पर सब कुछ लाइव दिखता है, तो लगता है जैसे दर्द और दिल का हर पल कैद हो रहा हो। वो आवाज़ें, वो लाइटें, सब कुछ इतना रियल लगता है कि लगता है मैं भी वहीं खड़ा हूं। टेक्नोलॉजी और इंसानियत का मिलन यहीं दिखता है।
लाल रंग की ब्लेजर में वो एंकर जब कैमरे की ओर देखती है, तो लगता है जैसे दर्द और दिल की कहानी सीधे दिल में उतर रही हो। उसकी आवाज़ में ठहराव और चेहरे पर विश्वास देखकर लगता है कि वो सिर्फ न्यूज़ नहीं, इमोशन भी बेच रही है।
पीछे शहर की रोशनी और सामने न्यूज़ डेस्क – ऐसा लगता है जैसे दर्द और दिल की कहानी शाम के सूरज के साथ ढल रही हो। वो लड़का जब कागज़ पढ़ता है तो लगता है वो सिर्फ स्क्रिप्ट नहीं, अपनी कहानी पढ़ रहा है।