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न्याय

सोनिया मल्होत्रा, जिन्हें कानून की रानी के नाम से जाना जाता है, एक बड़ी लॉयर हैं। वह विधायक लोकेश सिंह के लिए एक केस तैयार कर रही हैं। उधर, उनकी अपनी बेटी दीया और मम्मी रचना को उनकी ही क्लाइंट पूजा सिंह परेशान कर रही है। सोनिया अपनी असली पहचान बताती हैं, लेकिन पूजा को उन पर भरोसा नहीं होता। इसके बजाय, पूजा सोनिया और उनके पूरे परिवार को और भी बुरी तरह से बदतमीज़ी झेलने पर मजबूर कर देती है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

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गुस्से का पहाड़

लाल जैकेट वाली महिला का गुस्सा देखकर लगता है जैसे ज्वालामुखी फट पड़ा हो। वह सूट वाले आदमी पर चिल्ला रही है, लेकिन उसकी आवाज में डर भी साफ झलक रहा है। जब पुलिस उसे पकड़ती है, तो उसकी आंखों में बेबसी साफ दिखती है। न्याय के इस खेल में वह बुरी तरह फंस चुकी है और अब बचने का कोई रास्ता नहीं बचा है।

शातिर दिमाग

नीली ड्रेस वाली महिला की चालाकी देखकर दांतों तले उंगली दबानी पड़ती है। वह चुपचाप खड़ी होकर सब देख रही थी, जैसे शेरनी अपने शिकार का इंतजार कर रही हो। जब सही समय आया, तो उसने वार किया और सबके होश उड़ा दिए। न्याय दिलाने का यह तरीका बेहद खतरनाक लेकिन असरदार साबित हुआ है।

सूट वाला शैतान

गंजे सिर वाला यह आदमी शुरू में बहुत कॉन्फिडेंट लग रहा था, जैसे उसे अपनी जीत पर कोई शक ही न हो। लेकिन जैसे-जैसे सच्चाई सामने आई, उसके चेहरे के भाव बदलते गए। जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, तो उसकी आंखों में हैरानी और डर दोनों साफ दिख रहे थे। न्याय के रास्ते में उसकी सारी चालें फेल हो गईं।

घायल पर सबूत

सिर पर पट्टी बांधे वह लड़की शुरू में कमजोर लग रही थी, लेकिन उसने सबको चौंका दिया। उसने रिकॉर्डर निकाला और सबूत पेश करके सबकी बोलती बंद कर दी। उसकी आंखों में अब डर नहीं, बल्कि जीत की चमक थी। न्याय की इस लड़ाई में उसने साबित कर दिया कि कमजोर दिखना ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

मां का दर्द

लाल जैकेट वाली महिला जब रोने लगती है, तो लगता है कि उसका दिल टूट गया है। वह अपने बच्चे के लिए सब कुछ करने को तैयार थी, लेकिन उसकी गलतियां उसे बर्बाद कर गईं। उसका गुस्सा और रोना दोनों ही असली लगते हैं। न्याय के इस खेल में उसने सब कुछ खो दिया, अब उसके पास बस पछतावा बचा है।

पुलिस की एंट्री

जब पुलिस वाले कमरे में घुसे, तो माहौल एकदम बदल गया। उनकी वर्दी और उनका रवैया देखकर लगता है कि अब सब कुछ कानून के हवाले है। उन्होंने बिना किसी देरी के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। न्याय की यह प्रक्रिया इतनी तेजी से हुई कि किसी को संभलने का मौका भी नहीं मिला।

खामोश गवाह

पीछे खड़ा पुलिस वाला शुरू से सब चुपचाप देख रहा था। उसकी आंखों में सब कुछ साफ दिख रहा था, लेकिन वह बोला नहीं। जब सही समय आया, तो उसने अपनी भूमिका निभाई। न्याय के इस नाटक में वह एक खामोश गवाह की तरह था, जिसने सब कुछ रिकॉर्ड कर लिया था।

झूठ का अंत

सूट वाले आदमी के चेहरे पर जब झूठ पकड़ा गया, तो उसकी हालत देखने लायक थी। वह बचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सबूत उसके सामने थे। उसकी सारी चालें उल्टी पड़ गईं। न्याय के इस खेल में झूठ कभी नहीं जीत सकता, यह बात उसने आखिरकार मान ली।

जीत की मुस्कान

नीली ड्रेस वाली महिला के चेहरे पर जब जीत की मुस्कान आई, तो लगता है कि उसने बहुत बड़ी जीत हासिल की है। उसकी आंखों में संतोष और गर्व दोनों झलक रहे थे। उसने साबित कर दिया कि सच्चाई हमेशा जीतती है। न्याय की इस लड़ाई में वह सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी है।

अस्पताल में तूफान

जब अस्पताल के कमरे में सच्चाई का पर्दाफाश होता है, तो हर चेहरे का रंग बदल जाता है। वह लड़की जो बिस्तर पर लेटी थी, अचानक सबके सामने खड़ी होकर सबूत पेश करती है। उस नीली ड्रेस वाली महिला की मुस्कान देखकर लगता है कि उसने पहले से ही सब कुछ प्लान कर रखा था। न्याय की यह लड़ाई इतनी तेजी से मोड़ लेगी, किसी ने सोचा भी नहीं था।