शुरुआत में लगता है कि लाल बालों वाली महिला ही हीरो है, लेकिन जैसे-जैसे न्याय का खेल आगे बढ़ता है, असली चेहरा सामने आता है। अस्पताल के कमरे में हुई यह मारपीट सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक भी है। घायल लड़की का अंत में हथियार उठाना दिखाता है कि वह अब शिकार नहीं, शिकारी बन गई है। यह दृश्य रोमांच से भरपूर है।
वीडियो में वह छोटा सा रिकॉर्डर सबसे बड़ा सबूत बनकर उभरा। जब वह जमीन पर गिरता है, तो लगता है कि सब खत्म हो गया, लेकिन कहानी में न्याय का पहिया वहीं से घूमता है। लाल बालों वाली महिला का गुस्सा और घायल लड़की का दर्द दोनों ही असली लगते हैं। अंत में मॉप हैंडल वाला एक्शन देखकर तालियां बजाने का मन करता है। सस्पेंस का बेहतरीन नमूना।
बेड से गिरकर भी उस लड़की ने हार नहीं मानी। लाल बालों वाली महिला का हमला देखकर लगा कि अब सब खत्म, पर न्याय की कहानियों में हमेशा एक ट्विस्ट होता है। जब वह लड़की मॉप हैंडल लेकर वापस आई, तो नजरों में वही आग थी जो शुरुआत में गायब लग रही थी। यह दृश्य महिलाओं की ताकत को नए तरीके से दिखाता है। बहुत ही प्रभावशाली सीन है।
लाल बालों वाली महिला का चेहरा जब गुस्से से विकृत होता है, तो सच में डर लगता है। उसने जिस तरह से घायल लड़की पर हमला किया, वह देखकर सहमी हुई अनुभूति होती है। न्याय के नाम पर की गई यह हिंसा सवाल खड़े करती है। अस्पताल का माहौल और वहां की खामोशी इस डर को और बढ़ा देती है। अंत में लड़की का पलटवार देखकर राहत मिलती है।
रात के अस्पताल में यह टकराव किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं लगता। लाल बालों वाली महिला का हमलावर रूप और घायल लड़की की चीखें दिल को झकझोर देती हैं। न्याय की इस लड़ाई में कोई भी पीछे नहीं हट रहा। रिकॉर्डर का गिरना और फिर लड़की का हथियार उठाना, यह सब बहुत ही ड्रामेटिक है। ऐसे सीन देखने के लिए नेटशॉर्ट ऐप बेहतरीन प्लेटफॉर्म है।