इस दृश्य में नायक की आँखों में छिपा दर्द और भ्रम साफ झलकता है। जब वह चाकू को देख रहा होता है, तो लगता है जैसे वह अपने अतीत से जूझ रहा हो। फिर अचानक दृश्य बदलता है और एक शानदार समारोह का नज़ारा सामने आता है, जहाँ लोग ट्रॉफी लिए घूम रहे हैं। यह विरोधाभास दर्शकों को हैरान कर देता है। बुजुर्ग व्यक्ति का गुस्सा और युवक की मासूमियत के बीच का संघर्ष दिल को छू लेता है। परित्यक्त की कहानी में हर पल एक नया मोड़ लेता है, जो दर्शकों को बांधे रखता है।