बचपन से परिवार से दूर माया ने मंगेतर के लिए पढ़ाई छोड़ दी। सगाई पर उसने उसे छोड़ निया से शादी कर ली। भाइयों से मिलते ही निया ने उसे फँसाकर पहचान लगभग छीन ली। माया ने हार न मानी। कड़ी जाँच और सबूतों से उसने अपनी असली पहचान साबित की और भाइयों से जा मिली। उनकी मदद से उसने मंगेतर से बदला लिया और शाह परिवार की असली वारिस बनी।