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शेर की दुल्हन

मीरा शर्मा एक मेडिकल स्टूडेंट है। उसके पिता डॉन शर्मा को दुश्मन विक्रांत सिन्हा मार देता है, और मीरा को उससे शादी करनी पड़ती है। विक्रांत बदला चाहता है, लेकिन मीरा की रक्षा भी करता है, और उसे पता चलता है कि मीरा के पिता बहुत बुरे इंसान थे। दोनों प्यार करने लगते हैं, लेकिन मीरा विक्रांत को बचाने के लिए अपनी बेटी संग चली जाती है। दस साल बाद वह लौटती है। अब सामने खड़ा विक्रांत क्या फैसला लेता है? क्या मीरा और नैना के लिए वह अपना सब कुछ दांव पर लगा देगा?
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इस एपिसोड की समीक्षा

रिश्तों की बर्फ़

शुरू में लगता था सब ठीक है, पर जब उसने टैबलेट देखा तो आँखों में कुछ और ही था। शेर की दुल्हन में ऐसे मोड़ आते हैं जो रूह झकझोर देते हैं। उसकी खामोशी चीख रही थी कि दिल कहीं और है। प्यार दिखावा लगने लगा। हर इशारे में छुपा दर्द साफ दिख रहा था।

तस्वीर का राज़

वो फोटो किसकी थी? यही सवाल पूरे सीन में गूंजता रहा। जब वो मसाज गन लेकर उस तस्वीर को देख रही थी, तो सनसनी पैदा हो गई। शेर की दुल्हन की कहानी में ये छोटी चीज़ें बड़ा तूफान लाती हैं। बहुत गहराई है इसमें। रहस्य बना हुआ है।

पकड़े जाने का डर

जैसे ही वो दरवाज़े पर आया, उसकी सांसें रुक गईं। उस पल की घबराहट को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। शेर की दुल्हन में हर पल संदेह का साया बना रहता है। क्या वो पकड़ी जाएगी? ये सवाल दिमाग से नहीं निकल रहा। माहौल बहुत तनावपूर्ण था।

वर्कआउट का बहाना

जिम के कपड़े और वो मसाज गन, सब कुछ एक नाटक लग रहा था। असल में तो वो किसी और की यादों में खोई हुई थी। शेर की दुल्हन के किरदार बहुत परतदार हैं। हर एक्शन के पीछे कोई छुपा मकसद जरूर होता है यहाँ। समझना मुश्किल हो रहा है।

धोखे की बू

पहले वाले सीन में जो प्यार दिखा, वो सब झूठा था। जब वो अकेली हुई तो असली चेहरा सामने आया। शेर की दुल्हन में रिश्तों की कमजोरियों को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। देखकर गुस्सा भी आता है और तरस भी। सच्चाई कड़वी लगती है।

आँखों की जुबानी

उसकी आँखें सब कुछ बता रही थीं बिना कुछ बोले। जब वो उस तस्वीर को घूर रही थी, तो लगा वो उसमें जी रही है। शेर की दुल्हन की एक्टिंग बहुत असली लगती है। बिना डायलॉग के कहानी आगे बढ़ती है। चेहरे के भाव गजब के थे।

रंगों का खेल

नीली पोशाक से भूरे कपड़ों तक का सफर बहुत अर्थपूर्ण है। शुरुआत में नज़ाकत, बाद में जिद्द। शेर की दुल्हन की विजुअल स्टोरीटेलिंग कमाल की है। हर रंग किसी मूड को दर्शाता है। देखने में बहुत सुकून मिलता है। कलाकारी बेमिसाल है।

अंत क्या होगा

वो शख्स पीछे खड़ा होकर क्या सोच रहा होगा? क्या उसे सब पता चल गया? शेर की दुल्हन में क्लाइमेक्स की उम्मीद बढ़ती जाती है। हर एपिसोड के बाद बेचैनी होती है। जल्दी अगला पार्ट देखना चाहती हूँ। कहानी बहुत रोचक है।

जुनून की हद

किसी की तस्वीर को इतनी शिद्दत से देखना खतरनाक है। ये जुनून कहीं तबाही नहीं ले आए। शेर की दुल्हन में जज्बातों की गहराई बहुत ज्यादा है। इंसान कहीं भी गिर सकता है प्यार में। बहुत हैरान कर देने वाला सीन था। दिल दहल गया।

ऐप का मज़ा

ऐसे शो देखने का मज़ा ही अलग है। शेर की दुल्हन जैसे सीरीज रातों की नींद उड़ा देते हैं। कहानी में दम है और एक्टिंग में जान। नेटशॉर्ट ऐप पर देखना सबसे अच्छा लगता है। बिल्कुल सिनेमा जैसा अनुभव मिलता है। वक्त बर्बाद नहीं होता।