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सुन्दरियों के बीचवां7एपिसोड

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सुन्दरियों के बीच

पहाड़ से उतरने के बाद, नायक एक अमीर युवती की निजी सुरक्षा में लग जाता है। वह बहुत कोमल है, और धीरे-धीरे दोनों के बीच प्यार पनपने लगता है। युवती की सहेली पहले उसे धोखेबाज़ समझती है, लेकिन बाद में उसकी ईमानदारी देखकर सब गलतफहमियाँ मिट जाती हैं। तरह-तरह की मुश्किलों का सामना करते हुए, क्या नायक शहर के लोगों की पहचान और सम्मान हासिल कर पाएगा?
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इस एपिसोड की समीक्षा

अंगूर वाला लड़का और तनाव

उस हल्के भूरे कपड़ों वाले लड़के का अंदाज देखकर हैरानी हुई। सब गंभीर हैं और वो अंगूर खा रहा है। दादी साहिबा की डांट सुनकर भी उसे फर्क नहीं पड़ता। सुन्दरियों के बीच में ऐसा किरदार पहले नहीं देखा। विक्रम सिंह का चेहरा देखकर लगता है कि वो बहुत परेशान हैं। इस सीन में तनाव साफ झलकता है। हर कोई कुछ छिपा रहा है। मुझे ये नाटक बहुत पसंद आया।

दादी साहिबा का रौब

लाल साड़ी में दादी साहिबा का रौब पूरे कमरे पर छाया हुआ है। वो जब बोलती हैं तो सब चुप हो जाते हैं। राजीव सिंह भी उनकी बात मान रहे हैं। सुन्दरियों के बीच की कहानी में परिवार की ताकत दिखाई गई है। सेट बहुत आलीशान है जो अमीर परिवार को दर्शाता है। संवाद अदायगी बहुत दमदार लगी। नेटशॉर्ट पर देखने का मजा ही अलग है।

काले पोशाक वाली लड़की

काले पोशाक वाली लड़की बहुत खूबसूरत लग रही थी लेकिन चेहरे पर चिंता थी। उसके साथ खड़ा लड़का भी चुप था। विक्रम सिंह की आंखों में सवाल थे। सुन्दरियों के बीच में रिश्तों की जंग चल रही है। ये सीन बताता है कि पैसे से सब नहीं खरीदा जा सकता। परिवार के झगड़े बहुत गहरे हैं। कहानी में बहुत उतार चढ़ाव हैं।

मजेदार अंगूर वाला सीन

अंगूर वाला सीन बहुत मजेदार था। उसने जानबूझकर सबको चिढ़ाया होगा। दादी साहिबा को गुस्सा आना लाजमी था। राजीव सिंह कुछ साजिश रच रहे लगते हैं। सुन्दरियों के बीच की हर कड़ी नया मोड़ लाती है। अभिनय इतना असली लगा कि मैं खुद को उस कमरे में महसूस करने लगा। मंच बहुत शानदार है। मुझे और देखना है।

विक्रम सिंह की परेशानी

विक्रम सिंह की टाई और सूट देखकर लगता है कि वो व्यापारी हैं। लेकिन दादी साहिबा के आगे वो भी छोटे लग रहे थे। सुन्दरियों के बीच में सत्ता का संतुलन बहुत अच्छे दिखाए गए हैं। युवा लड़के की बेपरवाही देखकर हैरानी हुई। क्या वो सच में बेफिक्र है या नाटक कर रहा है। ये जानने के लिए देखते रहना होगा।

कमरे की फिल्मी सजावट

कमरे की सजावट और रोशनी बहुत फिल्मी थी। हर किरदार की पोशाक उनकी हैसियत बता रही थी। दादी साहिबा का गहना बहुत कीमती लग रहा था। सुन्दरियों के बीच में दृश्य कला बहुत अच्छी है। राजीव सिंह के कर्ली बाल और उनका अंदाज अलग था। सबके बीच की खामोशी शोर मचा रही थी।

छोटे संकेत बड़ी बात

जब उस लड़के ने अंगूर टेबल पर रखे तो सबकी नजरें उस पर थीं। ये छोटी हरकत बड़ी बात कह रही थी। विक्रम सिंह कुछ बोलना चाहते थे पर रुक गए। सुन्दरियों के बीच में ऐसे छोटे संकेत बहुत मायने रखते हैं। दादी साहिबा की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। कहानी में बहुत गहराई है।

भावनात्मक नाटक

काले जैकेट वाली लड़की की आंखों में आंसू थे या गुस्सा। समझना मुश्किल था। उसके साथ वाले लड़के ने उसे सहारा दिया। राजीव सिंह और विक्रम सिंह आपस में बातें कर रहे थे। सुन्दरियों के बीच में भावनात्मक नाटक बहुत है। परिवार की इज्जत बचाने की जंग चल रही है। हर कोई अपनी चाल चल रहा है।

बुजुर्गों का सम्मान

दादी साहिबा की आवाज में वजन था। उन्होंने सबको चुप करा दिया। हल्के भूरे कपड़ों वाले लड़के ने भी सिर झुका लिया। सुन्दरियों के बीच में बुजुर्गों का सम्मान दिखाया गया है। विक्रम सिंह की चिंता बढ़ती जा रही थी। ये सीन अंत की ओर इशारा करता है। मुझे अगली कड़ी देखने की जल्दी है।

तूफान से पहले की शांति

पूरा सीन एक तूफान से पहले की शांति जैसा था। सब जानते हैं कि कुछ बड़ा होने वाला है। राजीव सिंह की हंसी में चालाकी थी। सुन्दरियों के बीच का ये हिस्सा सबसे बेहतरीन लगा। मंच सजावट और कपड़ों का चुनाव बहुत सटीक था। हर किरदार का अपना महत्व है। दर्शक को बांधे रखने की कला इसमें है।