कॉलेज के दिनों में सानवी की एक अजनबी जय से मुलाकात हुई—छह साल बाद उसे पता चला कि वह अजनबी रायचंद परिवार का वारिस था और उसके बेटे शान का पिता है। अब वह और उसका बेटा उस चकाचौंध भरी दुनिया में खिंचे चले आते हैं, जहाँ ज़िंदगी उतनी आसान नहीं जितनी लगती थी…