तारा की ज़िंदगी में एक दिन सब कुछ बदल जाता है। उसका दिल उसके ज़िंदा रहते ही निकाल लिया जाता है। उसकी आत्मा घर लौटती है, और वहाँ क्या देखती है? उसका पूरा परिवार सोनिया को बधाई दे रहा है — क्योंकि उसने नवीन के लिए दिल दान करने वाला ढूंढ लिया है। उसके अपने माँ-बाप, जिनमें पिता पुलिस कमिश्नर हैं और माँ फोरेंसिक एक्सपर्ट हैं, शहर के सबसे बड़े शव-विच्छेदन मामले की जाँच में लग जाते हैं। पर वे यह नहीं पहचान पाते कि वह लाश उनकी अपनी बेटी की है। क्या तारा के माँ-बाप को कभी सच पता चलेगा?