सिंह भवन का ज्येष्ठ पुत्र आर्यन सिंह रण में अजेय, पर सगा भाई उसका श्रेय चुरा लेता है। गौरी शर्मा, उसकी बचपन की साथी, भी उसी भाई से जबरन ब्याही जाती है। सिर्फ गौरी जानती है असली युद्धदेवता आर्यन सिंह है; “युद्धदेवता से विवाह” का फरमान आते ही वह खुशी से कांप उठती है… पर क्या सच सामने आते ही सब कुछ पलट जाएगा?