शुरुआत में जो महिला भूरे सूट में थी, उसका चेहरा देखकर लग रहा था कि वो किसी बड़ी मुसीबत में फंस गई है। लेकिन जैसे ही सीन बदला और वो बेज रंग के कपड़ों में दादी से मिली, उसका आत्मविश्वास लौट आया। मेरा जलवा में ऐसे कैरेक्टर आर्क बहुत प्रभावशाली लगते हैं जब पात्र अपनी स्थिति को संभाल लेते हैं।
वो लाल लिफाफा जिस पर सोने का ड्रैगन बना था, सिर्फ एक उपहार नहीं बल्कि किसी बड़ी जिम्मेदारी की निशानी लग रहा था। जब दादी ने उसे सौंपा, तो हवा में एक अजीब सी गंभीरता थी। मेरा जलवा की कहानी में ये छोटी-छोटी चीजें बड़े प्लॉट की ओर इशारा करती हैं। देखना होगा कि उस लिफाफे में आखिर क्या था।
जब वो सफेद साड़ी वाली महिला आई और उसने लिफाफा थामा, तो उसके चेहरे पर एक अलग ही तरह की चमक थी। वो शायद इस खेल की सबसे बड़ी विजेता साबित होने वाली है। मेरा जलवा में ऐसे ट्विस्ट्स आते रहते हैं जो दर्शकों को हैरान कर देते हैं। उसकी मुस्कान में छिपी चालाकी देखने लायक थी।
पीछे खड़े गार्ड्स और कमरे की सजावट ने एक बहुत ही गंभीर माहौल बना दिया था। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा फैसला होने वाला हो। मेरा जलवा के इस सीन में डायरेक्शन बहुत मजबूत है, जहाँ बिना ज्यादा डायलॉग के ही तनाव महसूस होता है। हर किसी की आँखों में सवाल थे।
दादी माँ का किरदार बहुत दमदार है। उनकी बात करने का ढंग और चेहरे के हाव-भाव बता रहे हैं कि परिवार या कंपनी की असली कमान उन्हीं के हाथ में है। मेरा जलवा में ऐसे मजबूत महिला किरदार देखकर अच्छा लगता है जो अपनी शर्तों पर खेलती हैं। उनकी मुस्कान में एक राजसी ठाठ था।