वृद्ध महिला का प्रवेश और उनका गुस्सा देखकर लगा जैसे किसी राजा की रानी आ गई हो। उनकी छड़ी और आँखों में जो आग थी, उसने पूरे हॉल को शांत कर दिया। मेरा जलवा में भी ऐसे ही किरदार होते हैं जो बिना बोले सब कह जाते हैं।
उस लड़की की साड़ी और उसके चेहरे पर जो ठंडक थी, वह कमाल की थी। जैसे कुछ हुआ ही न हो। मेरा जलवा में भी हीरोइन ऐसे ही शांत रहती है जब सब कुछ टूट रहा होता है। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी।
वह नीले सूट वाला शख्स क्यों चुप था? क्या वह सब देख रहा था और कुछ नहीं कर सकता था? या फिर वह सबके पीछे का दिमाग था? मेरा जलवा में भी ऐसे किरदार होते हैं जो चुप रहकर भी सब कुछ बोल जाते हैं। उसकी आँखों में एक रहस्य था।
लाल कार्पेट पर गिरना और फिर उठकर खड़ा होना, यह सीन बहुत ड्रामेटिक था। जैसे कोई हीरो अपनी कहानी खुद लिख रहा हो। मेरा जलवा में भी ऐसे ही सीन होते हैं जहाँ गिरना भी एक जीत लगता है। उस शख्स की आँखों में दर्द था पर हार नहीं थी।
पीछे खड़ी भीड़ की प्रतिक्रिया देखकर लगा जैसे सबकी सांसें रुक गई हों। कोई कुछ बोल नहीं रहा था, बस देख रहा था। मेरा जलवा में भी ऐसे ही सीन होते हैं जहाँ चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचाती है। उस पल की खामोशी दिल दहला देने वाली थी।