शालू का घमंड देख कर गुस्सा आता है। उसने संजना की किस्मत छीन ली है और अब वह सिन्हा बहू बनने का नाटक कर रही है। संजना की आँखों में चमक कुछ और ही बताती है। (डब्ड) बदला स्वयंवर में ये बहनों की जंग देखने लायक है। जब संजना ने वह गेंद फेंकी थी तो लगा कुछ बड़ा होने वाला है।
राजा भेष बदल कर आम आदमी की तरह घूम रहा था। उसके नौकर को लगता था कि वह पकड़े जाएंगे पर उसे शांति चाहिए थी। जब उसने वह गेंद पकड़ी तो सबके होश उड़ गए। (डब्ड) बदला स्वयंवर का ये मोड़ बहुत हैरान कर देने वाला था। अब देखना है कि राजेश शर्मा की बेटी का क्या प्रतिक्रिया होगा।
शालू ने साफ़ कह दिया कि उसने संजना की अच्छी किस्मत छीन ली है। ये सुन कर दिल दुखी हो गया। पर लगता है संजना चुप नहीं बैठने वाली। (डब्ड) बदला स्वयंवर में बदले का तत्व बहुत मज़बूत है। शालू की चालाकी अब उसके खिलाफ़ जा सकती है जब राजा ने गेंद पकड़ ली।
स्वयंवर का दृश्य बहुत भव्य था। लोग चिल्लाते हुए भाग रहे थे और सुरक्षाकर्मी धक्का मुक्की कर रहे थे। बीच में वह अनजान आदमी खड़ा था जिसने गेंद पकड़ ली। (डब्ड) बदला स्वयंवर का ये दृश्य सबसे रोमांचक था। संजना ने शायद जान बूझ कर उसी को चुना हो क्योंकि उसमें कुछ अलग था।
राजेश शर्मा अपनी बेटियों पर बहुत दबाव डाल रहे हैं। उन्हें लगता है सिन्हा हवेली से जुड़ कर इज़्ज़त बढ़ेगी। पर संजना को बस एक अच्छा साथी चाहिए। (डब्ड) बदला स्वयंवर में परिवार की रचना को अच्छे से दिखाया गया है। माँ की बातें सुन कर लगता है वह संजना से ज़्यादा शालू को पसंद करती हैं।
शालू ने कहा कि पिछले जन्म में संजना ने धोखा दिया था। इसलिए वह अब बदला ले रही है। ये पुनर्जन्म वाली कहानी हमेशा दिलचस्प होती है। (डब्ड) बदला स्वयंवर में पिछले जन्म का संबंध कथानक को और गहरा करता है। अब राजा का उससे क्या नाता है ये जानना ज़रूरी है।
राजा के कपड़े फटे हुए थे पर उसकी चाल में शाही अंदाज़ था। सुरक्षाकर्मी ने उसे भिखारी समझा पर वह असली मालिक था। ये विरोधाभास बहुत अच्छी लगी। (डब्ड) बदला स्वयंवर में पहचान का ये खेल बहुत मज़ेदार है। जब उसने गेंद पकड़ी तो सुरक्षाकर्मी का चेहरा देखने लायक था।
संजना ने जब गेंद फेंकी तो सबको लगा वह किसी अमीर को चुनेगी। पर उसने उस अनजान आदमी को चुना जो भीड़ में खड़ा था। (डब्ड) बदला स्वयंवर में संजना का ये फ़ैसला सबको हैरान कर देगा। शायद वह भी कुछ जानती है जो हम नहीं जानते।
संवाद बहुत शक्तिशाली हैं ख़ास कर जब शालू कहती है कि वह हमेशा सावधान रहेगी। अभिनय भी काफी सहज लगता है। (डब्ड) बदला स्वयंवर की स्क्रिप्ट में दम है। हर पात्र का लक्ष्य स्पष्ट है और संघर्ष तुरंत समझ आ जाता है।
अंत में जब गेंद हवा में थी और सब उसे पकड़ने की कोशिश कर रहे थे, तनाव चरम पर था। राजा ने अंततः उसे पकड़ लिया। (डब्ड) बदला स्वयंवर का ये अंत अगले भाग के लिए उत्सुक कर देता है। अब शालू का क्या होगा जब संजना का चयन सबसे अलग निकला।
इस एपिसोड की समीक्षा
नवीनतम