इस सीन में राजकुमार लूसियन की आंखों में जो दर्द और जिद दिखी, वो दिल को छू गई। चर्च की शांति और फिर परिषद कक्ष की तनावपूर्ण बैठक ने कहानी को एक नया मोड़ दिया। (डब्ड) मुझे खोने के बाद तेरा रोना श्रृंखला में ऐसा लगता है कि अब असली खेल शुरू होने वाला है। बिना खून बहाए गद्दी हथियाने की योजना बहुत खतरनाक है, लेकिन लूसियन की चाहत उसे मंजिल तक ले जाएगी या बर्बाद कर देगी, यह देखना बाकी है। दर्शक इस मोड़ को लेकर काफी उत्सुक हैं।
वृद्ध सलाहकार की वफादारी और राजकुमार एडवर्ड की स्थिति पर चर्चा ने साबित कर दिया कि सत्ता के लिए रिश्ते भी छोटे पड़ जाते हैं। जब लूसियन ने कहा कि राज्य को एक योद्धा राजा चाहिए, तो कमरे में सन्नाटा छा गया। (डब्ड) मुझे खोने के बाद तेरा रोना की यह कड़ी राजनीति और भावनाओं का बेहतरीन मिश्रण है। बिना किसी बलिदान के सब कुछ पाने की चाह हर किसी के दिल में होती है, बस तरीके अलग होते हैं। यह दृश्य बहुत प्रभावशाली था।
दृश्य का छायांकन कमाल का है, खासकर चर्च के अंदर का दृश्य जहां क्रॉस की परछाईं सब कुछ कह रही थी। वेशभूषा भी उस जमाने का सही अहसास दिलाते हैं। (डब्ड) मुझे खोने के बाद तेरा रोना में हर दृश्य एक चित्र जैसा लगता है। कहानी में जब राजा के जन्मदिन पर कार्रवाई लेने की बात हुई, तो रोंगटे खड़े हो गए। यह सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि एक रणनीति है। कलाकारों ने जान डाल दी है।
राजकुमार एडवर्ड की अपाहिज स्थिति का फायदा उठाना नैतिक रूप से सही नहीं लग रहा, लेकिन राजनीति में यही चलता है। लूसियन ने साफ कर दिया कि वह अपने पिता को चोट नहीं पहुंचाना चाहता, पर राज्य की भलाई जरूरी है। (डब्ड) मुझे खोने के बाद तेरा रोना के इस कहानी के मोड़ ने सबको हैरान कर दिया। क्या सच में बिना खून बहाए सब कुछ बदल जाएगा? यह सवाल हर दर्शक के मन में है। कहानी बहुत रोचक हो गई है।
परिषद कक्ष में बैठे सभी सलाहकारों के चेहरे के भाव देखने लायक थे। कोई डरा हुआ था, तो कोई खुश कि अब बदलाव आएगा। एक व्यक्ति ने कहा कि हमारे खानदान सदियों से ताज की सेवा कर रहे हैं। (डब्ड) मुझे खोने के बाद तेरा रोना में दिखाया गया है कि कैसे पुराने लोग नई सोच के साथ समझौता करते हैं। संवाद अदायगी इतनी दमदार है कि आप पर्दा से आंखें नहीं हटा पाते। माहौल बहुत गंभीर था।
जब लूसियन ने टेबल पर उंगली रखकर कहा कि राज्य को एक योद्धा राजा चाहिए, तो उसकी आवाज में जो वजन था, वह काबिले तारीफ है। युवा अभिनेता ने अपने किरदार को बहुत गहराई से निभाया है। (डब्ड) मुझे खोने के बाद तेरा रोना की इस कड़ी में अभिनय के नए आयाम देखने को मिले। उसकी आंखों में जो जिम्मेदारी दिखी, वह किसी भी अनुभवी अभिनेता को शर्मिंदा कर दे। प्रशंसा के पात्र हैं वे।
आमतौर पर गद्दी बदलने के लिए युद्ध होते हैं, लेकिन यहां बिना खून बहाए सब कुछ करने की योजना बनाई गई है। यह दिखाता है कि बुद्धि तलवार से ज्यादा तेज होती है। (डब्ड) मुझे खोने के बाद तेरा रोना में यह नया अंदाज दर्शकों को बहुत पसंद आ रहा है। राजा के जन्मदिन पर ऐलान करना एक बहुत बड़ा जोखिम है, लेकिन इनाम भी बहुत बड़ा है। यह सोच बहुत ही अनोखी है।
दृश्य की शुरुआत चर्च के शांत वातावरण से होती है, जहां लूसियन अकेले खड़े हैं। यह शांति तूफान से पहले की शांति लग रही थी। हाथ में तलवार की मूठ पकड़ना उसकी तैयारी को दर्शाता है। (डब्ड) मुझे खोने के बाद तेरा रोना का यह दृश्य कहानी की गंभीरता को बयां करता है। जब वह बाहर निकले और एक बूढ़े व्यक्ति ने उन्हें देखा, तो लगा कि अब सब कुछ बदलने वाला है। दृश्य बहुत सुंदर था।
अपने ही भाई या पिता के खिलाफ साजिश रचना कितना मुश्किल होता है, यह लूसियन के चेहरे पर साफ दिख रहा था। उसने कहा कि वह अपने पिता को चोट नहीं पहुंचाना चाहता था। (डब्ड) मुझे खोने के बाद तेरा रोना में पारिवारिक कलह को बहुत बखूबी दिखाया गया है। सत्ता के मोह में इंसान क्या कुछ नहीं कर जाता, यह कहानी हमें यही सिखाती है कि रिश्ते नाजुक होते हैं। भावनाएं उमड़ पड़ीं।
अब जब फैसला हो गया है कि लूसियन को ही गद्दी संभालनी चाहिए, तो कहानी अपने चरमोत्कर्ष की ओर बढ़ रही है। सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और बस घोषणा बाकी है। (डब्ड) मुझे खोने के बाद तेरा रोना के प्रशंसकों के लिए यह सबसे रोमांचक हिस्सा होने वाला है। आगे क्या होगा, क्या राजा मान जाएंगे या फिर कोई बड़ा धमाका होगा, यह जानने के लिए हम बेताब हैं। इंतजार मुश्किल है।
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