अस्पताल के लंबे कोरिडोर में खड़ी उस लड़की की आंखों में जो गहरा दर्द था, वो देखकर दिल भर आया। जब उसने चमकती अंगूठी काउंटर पर छोड़ी, तब लगा जैसे सब खत्म हो गया। अंगूठी जो मैंने अलविदा कहकर गिरा दी कहानी की शुरुआत ही इतनी दर्दनाक है कि आगे क्या होगा सोचकर ही रोंगटे खड़े होते हैं।
यादों में ताजा वो पल जब वह लड़का घुटनों पर बैठकर प्रपोज कर रहा था, सब कुछ कितना खूबसूरत लग रहा था। पर अब उसी लड़के की आंखों में दूसरी चमक देखकर वो पूरी तरह टूट गई। अंगूठी जो मैंने अलविदा कहकर गिरा दी में दिखाया गया है कि प्यार कैसे धोखा बन सकता है। काश वो पल हमेशा के लिए रुक जाता।
घर के अंदर वो खामोशी चीख रही थी। दोनों सोफे पर बैठे थे पर बात करने को कुछ नहीं था। सूट वाला लड़का कुछ समझाने की कोशिश कर रहा था पर उस लड़की का चेहरा पत्थर जैसा था। अंगूठी जो मैंने अलविदा कहकर गिरा दी के इस दृश्य में बिना संवाद के ही सब कह दिया गया है। चुप्पी सबसे बड़ा शोर होती है।
खेत वाले घर पर वो सफेद पोशाक वाली लड़की अचानक आ गई और सब बदल गया। उसकी चमकती हुई नकली मुस्कान और गले का भारी हार सब कुछ योजना लग रहा था। अंगूठी जो मैंने अलविदा कहकर गिरा दी में ये किरदार सबसे ज्यादा रहस्यमयी लगा। क्या वो सच में प्यार करती है या बस दिखावा कर रही है?
जब उस लड़की ने घोड़े पर सवारी की, तो लगा जैसे वो अपनी तकलीफों से भागना चाह रही हो। सूट वाला लड़का बागडोर संभाले था पर उसका ध्यान कहीं और था। अंगूठी जो मैंने अलविदा कहकर गिरा दी के इस सीन में प्रकृति और इंसान के बीच का जुड़ाव बहुत खूबसूरत दिखाया गया है। हरा भरा मैदान और उदास चेहरे।
अस्तबल के अंदर छुपकर वो लड़की सब देख रही थी। जब उसने उन दोनों को गले लगते देखा, तो उसकी मुट्ठियां भिंच गईं। उस पल का गुस्सा और बेबसी साफ झलक रही थी। अंगूठी जो मैंने अलविदा कहकर गिरा दी में ईर्ष्या का ये पल सबसे तीव्र था। कोई भी उसकी जगह होता तो रो पड़ता।
उसने अपनी हथेली में कुछ छुपा रखा था। जब उसने हाथ खोला तो वो छोटी सी चीज देखकर हैरानी हुई। क्या वो दवाई थी या कोई और सबूत? अंगूठी जो मैंने अलविदा कहकर गिरा दी की कहानी में मोड़ यहीं से शुरू होता है। छोटी चीजें बड़े राज खोलती हैं। अब वो क्या करेगी ये देखना बाकी है।
अंत में जब उस लड़के ने प्राथमिक उपचार की पेटी लाकर उसकी मदद की, तो लगा शायद अभी सब ठीक हो जाए। उसकी आंखों में चिंता साफ दिख रही थी। अंगूठी जो मैंने अलविदा कहकर गिरा दी में ये उम्मीद की किरण थी। क्या प्यार फिर से जीत पाएगा या सब देर हो चुकी है? ये सवाल बना हुआ है।
संवाद से ज्यादा इनकी आंखें बात कर रही थीं। कभी गुस्सा, कभी प्यार, कभी नफरत। अभिनय इतना स्वाभाविक है कि लगा ये सच में हो रहा है। अंगूठी जो मैंने अलविदा कहकर गिरा दी के कलाकारों ने कमाल कर दिया है। बिना बोले ही दर्द बयां कर दिया। ऐसे दृश्य बार बार देखने को मन करता है।
अभी तक तो बस शुरुआत लगी है। इतना नाटक देखकर लग रहा है कि आगे और भी बड़ा धमाका होने वाला है। अंगूठी जो मैंने अलविदा कहकर गिरा दी की हर कड़ी नया मोड़ ले रही है। ऐसे शो देखना सुकून देता है। बस जल्दी से अगला हिस्सा आए और पता चले कि आखिर सच क्या है।