इस शानदार घर में माहौल बहुत तनावपूर्ण है। हुड वाली लड़की शांत खड़ी है जबकि गुलाबी जैकेट वाली कुछ छुपा रही है। माँ की आँखों में आँसू देखकर दिल दुखा। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसे मोड़ बहुत आते हैं। लॉकेट गिरने का वो पल बहुत नाटकीय था। सबकी नज़रें उसी टूटे हुए टुकड़े पर थीं। कोई नहीं जानता था कि आगे क्या होगा। ये रहस्य बहुत बढ़िया है। दर्शक भी हैरान रह गए।
जब गुलाबी कपड़ों वाली ने लॉकेट दिया तो लगा कुछ गड़बड़ है। फिर वो नीला पर्दा प्रभाव आया जो बता रहा था कि कुछ तकनीक वाला खेल चल रहा है। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी में ये जादूई अंगूठी जैसा लग रहा था। हुड वाली लड़की की आँखों में डर नहीं बल्कि गुस्सा था। उसने कुछ कहा नहीं बस देखती रही। ये चुप्पी शोर से ज्यादा थी।
माँ का रोना असली लग रहा था या नाटक? जब उसने हुड वाली का हाथ पकड़ा तो लगा वो माँ है। लेकिन फिर गुलाबी वाली की मुस्कान सब शक पैदा करती है। असली वारिस, सच्ची जीत में रिश्तों की ये उलझन बहुत गहरी है। पिता जी चुपचाप सब देख रहे थे जैसे कोई योजना बना रहे हों। हर किसी के चेहरे पर सवाल थे। माहौल बहुत भारी था।
सफेद हुड वाली लड़की सबसे अलग लग रही थी। बाकी सब अमीर कपड़ों में थे पर वो साधारण। फिर भी उसका आत्मविश्वास देखने लायक था। जब लॉकेट टूटा तो वो हिली भी नहीं। असली वारिस, सच्ची जीत में नायिका की ये खामोशी सबसे बड़ी ताकत है। मुझे ये किरदार बहुत पसंद आया। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। वो डरी नहीं लग रही थी।
भूरे सूट वाले व्यक्ति की चुप्पी सबसे ज्यादा डरावनी थी। वो कुछ बोल नहीं रहे थे बस देख रहे थे। शायद वो जानते हैं कि असली वारिस कौन है। गुलाबी वाली की चालाकी और हुड वाली की सच्चाई के बीच ये जंग देखने में मज़ा आ रहा है। मंच सजावट बहुत आलीशान है। कमरे की सजावट ने अमीरी दिखाई। असली वारिस, सच्ची जीत की ये कड़ी शानदार है। सबने अच्छा किया।