जेल की उस ठंडी दीवारों के बीच जो गर्माहट इन दोनों के बीच देखने को मिली वो कमाल की थी। सेनापति की आंखों में गुस्सा भी था और एक अजीब सी नर्मी भी। राजीव सिंह की हालत देखकर दिल पसीज गया पर सेनापति का रवैया बहुत सख्त लग रहा था। आलसी सेनापति और उसके खूबसूरत पति नामक इस धारावाहिक में ऐसा मोड़ किसी ने नहीं सोचा था। चेहरे पर खून के निशान और फिर भी वो मुस्कान देखकर लगता है कि इनकी कहानी अभी बहुत आगे जाने वाली है। सच्ची लगन और जुनून का उदाहरण है।
जब वो जंजीरों में जकड़ा हुआ था तब भी उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी। सेनापति महिला होने के बावजूद कितनी निडर होकर उसके करीब गई। यह दृश्य बताता है कि प्यार और नफरत की लकीर कितनी पतली होती है। आलसी सेनापति और उसके खूबसूरत पति की कहानी में यह पल सबसे यादगार बन गया है। राजकुमार की चुप्पी और सेनापति के सवाल दोनों के बीच एक अनकही बात चल रही थी। माहौल में तनाव था पर फिर भी रोमांस झलक रहा था।
राजीव सिंह के चेहरे पर वो खरोंचें देखकर बहुत बुरा लगा पर सेनापति का अंदाज कुछ और ही था। उसने जैसे ही हाथ लगाया सब कुछ बदल सा गया। दुश्मन देश का राजकुमार होने के बावजूद इनके बीच का लगाव साफ दिख रहा था। आलसी सेनापति और उसके खूबसूरत पति में ऐसे संवाद और कार्य देखने को मिलते हैं जो दिल को छू लेते हैं। जेल का अंधेरा भी इनके बीच की रोशनी को कम नहीं कर पा रहा था। बहुत ही खूबसूरत तरीके से यह दृश्य फिल्माया गया है।
सेनापति की वर्दी और राजकुमार के फटे हुए कपड़ों का विरोधाभास बहुत गहरा था। लगता है कि इन दोनों की कहानी में बहुत से राज छिपे हुए हैं। जब सिपाही आए तब तक का जो इंतजार था वो बहुत रोमांचक था। आलसी सेनापति और उसके खूबसूरत पति के हर भाग में नया मोड़ आता है। राजीव सिंह की आंखों में जो दर्द था वो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। सेनापति ने भी अपने आप को संभाले रखा पर दिल की बात छिपा नहीं पाई।
इस धारावाहिक में जो रसायन दिखाई गया है वो लाजवाब है। सेनापति का किरदार बहुत मजबूत है और राजकुमार का किरदार रहस्यमयी। आलसी सेनापति और उसके खूबसूरत पति नाम से ही लगता था कि कुछ खास होगा पर यह उससे भी बढ़कर है। जंजीरों की आवाज और मोमबत्ती की रोशनी ने माहौल को और भी नाटकीय बना दिया। राजीव सिंह की खामोशी भी बहुत कुछ कह रही थी। दर्शकों के लिए यह एक आश्चर्य है जो बिल्कुल निराश नहीं करता।
जब सेनापति ने राजकुमार के चेहरे को छूा तो समय जैसे थम सा गया। दुश्मन होते हुए भी एक अजीब सा खिंचाव दोनों के बीच महसूस हुआ। आलसी सेनापति और उसके खूबसूरत पति की पटकथा बहुत मजबूत है। राजीव सिंह के घाव देखकर सेनापति के चेहरे के भाव बदल गए। यह बताता है कि युद्ध के मैदान में भी इंसानियत बाकी रहती है। जेल की सलाखें इनके बीच की दीवार नहीं बन पा रही थीं। बहुत ही भावुक कर देने वाला दृश्य था जो लंबे समय तक याद रहेगा।
राजकुमार की हालत देखकर कोई भी इंसान द्रवित हो जाए पर सेनापति का रुख सख्त था। शायद यह उसकी मजबूरी थी या फिर कोई बड़ी योजना। आलसी सेनापति और उसके खूबसूरत पति में ऐसे दृश्य बार बार देखने को मिलते हैं। राजीव सिंह की आंखों में आंसू थे पर उसने गिरने नहीं दिए। सेनापति ने भी अपने दिल की धड़कनों को काबू में रखा। यह जंग सिर्फ तलवारों से नहीं लड़ी जा रही बल्कि दिलों से भी लड़ी जा रही है।
माहौल में जो सन्नाटा था वो चीखों से ज्यादा शोर मचा रहा था। सेनापति और राजकुमार के बीच की दूरी कम होती गई पर फिर भी एक खाई बनी रही। आलसी सेनापति और उसके खूबसूरत पति की कहानी में यह मोड़ बहुत अहम है। राजीव सिंह को जब सिपाही ले गए तब सेनापति की आंखों में चिंता साफ दिखी। यह बताता है कि वह उसे सिर्फ एक कैदी नहीं समझती। बहुत ही बारीकी से इनके जज्बातों को पर्दे पर उतारा गया है।
वर्दी में सेनापति कितनी खूबसूरत लग रही थीं और राजकुमार के कपड़े फटे हुए थे। यह विपरीत स्थिति इनके रिश्ते को और भी दिलचस्प बना रही है। आलसी सेनापति और उसके खूबसूरत पति में पोशाक डिजाइन भी बहुत अच्छा है। राजीव सिंह के बाल और श्रृंगार ने किरदार को जान डाल दी है। जेल की दीवारें गवाह बन रही थीं इन दोनों के बीच की अनकही दास्तान की। हर दृश्य एक तस्वीर की तरह दिल को छू लेता है।
अंत में जब सेनापति मुस्कुराई तो लगता है कि उसने कुछ योजना बनाई है। राजकुमार को ले जाने वाले सिपाही भी इस खेल का हिस्सा लग रहे थे। आलसी सेनापति और उसके खूबसूरत पति का अगला भाग देखने की बेसब्री बढ़ गई है। राजीव सिंह की किस्मत में क्या लिखा है यह तो वक्त ही बताएगा। सेनापति की चालाकी और राजकुमार की मजबूरी का यह खेल बहुत आगे तक चलने वाला है। दर्शकों के लिए यह एक बेहतरीन मनोरंजन का संग्रह है।