प्रिया जोशी सालों से जबरन गूंगी बनकर जीती रही। एक अपहरण में उसे गलतफहमी हो जाती है कि ईशान चौहान उसके पेट में पल रहे बच्चे को नहीं चाहता। बच्चे को बचाने के लिए वह फोन पर अपहरणकर्ता बनकर ईशान चौहान से सौदेबाज़ी करती है। हर कॉल के साथ सच सामने आता है, गलतफहमियाँ टूटती हैं और ईशान उसे अपनी असली आवाज़ लौटाने की हिम्मत देता है… पर आख़िरी कॉल में किसका राज़ खुलने वाला है?