आदित्य सिंह का किरदार दिल को छू लेता है। पहले वह फाल्कन टीम का बहादुर सदस्य था और अब पहिएदार कुर्सी में है। पांच साल बाद का दृश्य बहुत भावुक है। वह अपने कुत्ते के साथ अकेलापन महसूस करता है। दीवार के पार दुश्मन कहानी में यह बदलाव बहुत अहम है। उसकी आंखों में अभी भी आग है। वह हारा नहीं है। वह बदला लेगा। उसकी आंखों में आंसू और गुस्सा दोनों हैं। यह कहानी बहुत गहरी है।
पशु चिकित्सक के पास जाने वाला सीन बहुत प्यारा था। आदित्य अपने कुत्ते को खोने से डर रहा है। उसकी आंखों में आंसू देखकर लगता है कि वह सिर्फ अपने दोस्त को नहीं बचाना चाहता। यह शो दिखाता है कि इंसान और जानवर का रिश्ता कितना गहरा होता है। दीवार के पार दुश्मन में ऐसे पल कहानी को गहराई देते हैं। दर्शक रो पड़ते हैं। कुत्ता भी समझ रहा है।
जब आदित्य दीवार पर स्टैथोस्कोप लगाता है तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वह समझ गया कि दीवार के पीछे कुछ गड़बड़ है। उसकी सूझबूझ देखकर लगता है कि वह हारा नहीं है। वह चुपचाप सबूत इकट्ठा कर रहा है। दीवार के पार दुश्मन का यह हिस्सा सबसे रोमांचक है। अब वह चुप नहीं बैठेगा। बदला लेगा। वह जानता है क्या करना है।
पहिएदार कुर्सी में बैठकर भी उसने ड्रिलिंग की और कैमरा लगा दिया। यह दिखाता है कि उसका हौसला नहीं टूटा है। कंप्यूटर पर वह सब देख रहा था जो नीचे हो रहा था। दुश्मनों को खबर भी नहीं हुई। दीवार के पार दुश्मन में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बहुत स्मार्ट तरीके से दिखाया गया है। आदित्य की तैयारी पूरी है। वह चुपचाप वार करेगा।
विलेन दिलीप चौहान का एंट्री बहुत धमाकेदार है। वह सिगरेट पीते हुए अपने आदमियों को हुक्म दे रहा है। उसकी आंखों में क्रूरता साफ दिखती है। आदित्य को उसे देखकर गुस्सा आ रहा है। दीवार के पार दुश्मन में विलेन का किरदार बहुत मजबूत लिखा गया है। अब बदले की आग भड़केगी। सब डर रहे हैं। वह बहुत खतरनाक है।
मनोज जोशी का किरदार पुलिस चीफ के रूप में आता है। उसकी एंट्री से कहानी में नया मोड़ आता है। क्या वह सच्चा है या विलेन के साथ है? आदित्य की नजरें उसे घूर रही हैं। दीवार के पार दुश्मन में हर किरदार के पीछे एक राज है। यह शक की फिजा बनाए रखता है। दर्शक हैरान रह जाते हैं। सच क्या है। कोई नहीं जानता।
आदित्य ने तुरंत फोन उठाया और नंबर डायल किया। उसने सोचा नहीं बस एक्शन लिया। वह जानता था कि वक्त कम है। दीवार के पार दुश्मन में यह सीन क्लाइमेक्स की शुरुआत है। उसकी आंखों में अब डर नहीं बस जुनून है। वह न्याय चाहता है और उसे मिलकर रहेगा। कोई नहीं रोक सकता। वह लड़ेगा।
बेसमेंट का सेट बहुत डरावना और असली लगता है। धूल, मिट्टी और अंधेरा माहौल कहानी को गंभीर बनाता है। वहां कैद लोग मदद के लिए चिल्ला रहे हैं। आदित्य यह सब देखकर बेचैन है। दीवार के पार दुश्मन का यह सेट डिजाइन बहुत तारीफ के लायक है। यह माहौल दर्शक को बांधे रखता है। बहुत अच्छा है। सबको पसंद आएगा।
पांच साल का इंतजार आदित्य ने किया है। अब वह चुप नहीं बैठेगा। उसकी आंखों में जो चमक है वह बताती है कि वह सब कुछ बदल देगा। दीवार के पार दुश्मन में बदले की कहानी बहुत दमदार है। वह अपने शरीर की परवाह नहीं कर रहा। बस उसे सच सामने लाना है। यह प्रेरणादायक है। सबको पसंद आएगा। वह जीतेगा।
यह शो नेटशॉर्ट ऐप पर देखना बहुत अच्छा लगा। कहानी की रफ्तार बहुत तेज है। हर एपिसोड में नया सस्पेंस है। आदित्य का संघर्ष देखकर दिल भर आता है। दीवार के पार दुश्मन जैसे शो हिंदी सिनेमा में नए आयाम खोल रहे हैं। मैं आगे क्या होगा यह जानने के लिए बेताब हूं। सबको देखना चाहिए। मजा आएगा। बहुत बढ़िया।