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न्याय

सोनिया मल्होत्रा, जिन्हें कानून की रानी के नाम से जाना जाता है, एक बड़ी लॉयर हैं। वह विधायक लोकेश सिंह के लिए एक केस तैयार कर रही हैं। उधर, उनकी अपनी बेटी दीया और मम्मी रचना को उनकी ही क्लाइंट पूजा सिंह परेशान कर रही है। सोनिया अपनी असली पहचान बताती हैं, लेकिन पूजा को उन पर भरोसा नहीं होता। इसके बजाय, पूजा सोनिया और उनके पूरे परिवार को और भी बुरी तरह से बदतमीज़ी झेलने पर मजबूर कर देती है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

गुस्से का विस्फोट

सूट पहने उस आदमी का गुस्सा देखकर लग रहा था कि वो किसी बड़े अधिकारी या पिता की भूमिका में है। उसने लड़की को धक्का दिया और फिर ज़बरदस्ती उसे बिस्तर पर गिरा दिया। ये दृश्य इतना तीव्र था कि न्याय शब्द भी बेमानी लगने लगा। सब कुछ अन्यायपूर्ण लग रहा था।

माँ या दुश्मन?

लाल ड्रेस वाली औरत का व्यवहार बहुत अजीब था। कभी वो चिल्ला रही थी, कभी वो लड़की को पकड़ रही थी। क्या वो उसकी माँ है या कोई और? उसके चेहरे पर चिंता और गुस्सा दोनों थे। न्याय की उम्मीद में ये किरदार बहुत भ्रमित करने वाला था।

छोटी सी डिवाइस, बड़ा राज

शुरुआत में लड़की के हाथ में एक छोटी काली डिवाइस थी। शायद वो कोई रिकॉर्डिंग थी या सबूत? फिर वो डिवाइस गायब हो गई। क्या उस आदमी ने छीन ली? ये छोटी चीज़ पूरी कहानी को बदल सकती है। न्याय के लिए सबूत ज़रूरी होते हैं।

आखिरी में आई नई हीरोइन

जब सब कुछ खत्म होता लग रहा था, तभी नीली ड्रेस वाली एक नई औरत आई। उसका चेहरा गंभीर था और चलने का अंदाज़ भी। लगता है वो किसी मदद के लिए आई है या शायद न्याय दिलाने। उसकी एंट्री ने पूरी कहानी में नई उम्मीद जगा दी।

बिस्तर से ज़मीन तक का सफर

लड़की को बिस्तर से ज़बरदस्ती उठाया गया और फिर ज़मीन पर गिराया गया। ये दृश्य इतना दर्दनाक था कि लग रहा था जैसे उसकी आत्मा भी टूट गई हो। न्याय की बात तो दूर, इंसानियत भी शर्मिंदा हो गई। ऐसे दृश्य देखकर दिल भारी हो जाता है।

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