एडगर की आँखों में वो तस्वीर देखकर लगा जैसे पूरा दर्द एक पल में बाहर आ गया हो। बारिश में गिरी बच्ची, चीखती माँ और छाता थामे खड़ा एडगर—सब कुछ इतना तीव्र था कि साँस रुक गई। मेरे अनजान अरबपति पिता में ऐसे मोड़ आते हैं जो दिल को छू लेते हैं। नेटशॉर्ट पर देखते वक्त लगा जैसे मैं भी वहीं खड़ी हूँ, भीग रही हूँ, रो रही हूँ। एडगर का चुप रहना भी एक चीख था।