अस्पताल के बिस्तर पर बैठे उस लड़के की घबराहट साफ दिख रही थी। फोन की घंटी बजते ही उसके चेहरे के भाव बदल गए। पहले खुशी फिर गुस्सा। विक्टर की आवाज़ ने सब बदल दिया। मेरे एक्स का माफिया डैडी देखते वक्त लगा कि यह कहानी बहुत गहरी है। अस्पताल का माहौल और वो रहस्यमयी कॉल किसी थ्रिलर से कम नहीं लग रहा था। दर्शक भी हैरान रह गए। सस्पेंस बना रहा।
सफेद कमीज वाले उस शख्स की मुस्कान में कुछ खतरनाक था। वह मरीज के पास खड़ा होकर ऐसे बात कर रहा था जैसे सब कुछ उसके कब्जे में हो। मेरे एक्स का माफिया डैडी की यह सीन बहुत तनावपूर्ण थी। गलियारे में चलते हुए उसकी चाल में एक अलग ही अकड़ थी। वह दरवाजे पर खड़ा होकर जो देख रहा था, वह डरावना था। कोई नहीं समझ पाया। असली मकसद छिपा था।
विक्टर का किरदार बहुत रहस्यमयी लगा। काली टोपी और चश्मे में वह फोन पर बात कर रहा था। उसकी आवाज़ में एक अजीब सा ठंडापन था। मेरे एक्स का माफिया डैडी में विलेन का ऐसा रूप पहले नहीं देखा। उसने फोन रखते ही जो मुस्कान दी, उससे रोंगटे खड़े हो गए। यह कहानी आगे बहुत आगे जाने वाली है। सब डर गए। माहौल भारी था।
उस कमरे में छिपा हुआ ब्लॉन्ड लड़का बहुत डरा हुआ लग रहा था। खिड़की से चांदनी आ रही थी और वह कोने में सहमा हुआ था। मेरे एक्स का माफिया डैडी का यह हिस्सा दिल दहला देने वाला था। उसे किसी का इंतज़ार था या वह किसी से भाग रहा था। उसकी आंखों में साफ डर झलक रहा था जो दर्शकों तक पहुंच गया। बहुत बुरा लगा। स्थिति गंभीर थी।
अस्पताल की रात की रोशनी और नीली छायाएं बहुत अच्छी थीं। हर सीन में एक अजीब सा सस्पेंस बना हुआ था। मेरे एक्स का माफिया डैडी की सिनेमेटोग्राफी ने कहानी को और भी रोचक बना दिया। फोन की घंटी से लेकर दरवाजे की आहट तक, हर आवाज़ मायने रख रही थी। यह एक साधारण अस्पताल नहीं लग रहा था। माहौल गजब का था। नज़ारा अद्भुत था।
मरीज और उस आगंतुक के बीच की केमिस्ट्री बहुत जटिल लग रही थी। क्या वे दोस्त हैं या दुश्मन। मेरे एक्स का माफिया डैडी में रिश्तों की यह उलझन बहुत अच्छे से दिखाई गई है। सफेद फूलों वाली कमीज पहने वह लड़का किसी एंजेल से कम नहीं लग रहा था पर उसकी नीयत शक पैदा कर रही थी। समझ नहीं आया। कशमकश बढ़ गई।
फोन कॉल के बाद मरीज के चेहरे पर जो झटका लगा, वह कहानी का टर्निंग पॉइंट लग रहा था। मेरे एक्स का माफिया डैडी की कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। विक्टर के साथ बातचीत ने सब कुछ बदल दिया। अब लग रहा है कि अस्पताल में भर्ती होना कोई संयोग नहीं था। सब कुछ पहले से योजनाबद्ध लग रहा है। हैरानी हुई। प्लॉट गजब था।
गलियारे में चलते हुए उस लड़के का अंदाज बहुत लापरवाह था। जैसे उसे किसी चीज का डर नहीं है। मेरे एक्स का माफिया डैडी में यह किरदार बहुत प्रभावशाली बनाया गया है। वह दरवाजे के पास रुका और अंदर झांका। उसकी मुस्कान में एक चालाकी थी जो आसानी से पकड़ में नहीं आ रही थी। बहुत खतरनाक लगा। अंदाज निराला था।
उस अंधेरे कमरे में बैठा लड़का बार बार अपने मुंह को ढक रहा था। उसे लग रहा था कि कोई उसे देख रहा है। मेरे एक्स का माफिया डैडी का यह डर का माहौल बहुत असली लगा। चांदनी रात और वह सुनसान कमरा किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं था। दर्शक भी उसकी जगह होते तो सहम जाते। दिल घबरा गया। डर साफ था।
यह शो शुरू से ही दर्शकों को बांधे रखता है। हर किरदार के पीछे एक राज छिपा हुआ है। मेरे एक्स का माफिया डैडी देखते समय लगा कि यह सिर्फ एक ड्रामा नहीं है। अस्पताल की दीवारें भी कुछ छिपाए हुए हैं। विक्टर का नाम सुनते ही कहानी में एक नया आयाम आ गया है। बहुत पसंद आया। कहानी जबरदस्त है।