रात की सड़क पर वो काली गाड़ी जब चल रही थी, तभी समझ आ गया कि खतरा बढ़ने वाला है। गोदाम के अंदर का नज़ारा देखकर रूह कांप गई। चाकू और बंदूक के बीच का वो खेल देखते ही बनता था। मेरे एक्स का माफिया डैडी ने इस दृश्य में जान डाल दी है। सफेद शर्ट वाले की हंसी सबसे डरावनी थी।
शुरू में लग रहा था कि बस एक अमीर आदमी की कहानी है, पर फिर पता चला कि मामला गंभीर है। कुर्सी से बंधे लड़के की आंखों में आंसू देखकर दिल पसीज गया। बचाने वाले की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। मेरे एक्स का माफिया डैडी की कहानी में ऐसा मोड़ नहीं देखा था। अभिनय जबरदस्त है।
खलनायक का किरदार इतना खूबसूरत पर खतरनाक कैसे हो सकता है? गले में चाकू रखकर भी वो मुस्कुरा रहा था। सामने वाले ने बिना समय गंवाए बंदूक तान दी। मेरे एक्स का माफिया डैडी में हर किरदार की अपनी अलग पहचान है। रोशनी और माहौल बहुत ही रहस्य से भरा हुआ था।
आलीशान कार से लेकर अंधेरे गोदाम तक का सफर बहुत ही नाटकीय था। जो लड़का बंधा हुआ था, उसके कपड़ों पर खून देखकर झटका लगा। बचाने वाले की हिम्मत की दाद देनी होगी। मेरे एक्स का माफिया डैडी ने मारधाड़ और जज्बात का सही संतुलन बनाया है। नेटशॉर्ट पर देखने का मज़ा ही अलग है।
इस दृश्य में संवाद से ज्यादा भाव बोल रहे थे। बंदूक की नोक पर भी खलनायक नहीं डरा। उल्टा वो और पागल होता गया। मेरे एक्स का माफिया डैडी की कहानी बहुत मजबूत लग रही है। दर्शक को बांधे रखने की कला इनको अच्छे से आती है। रात भर लगातार देखने का मन किया।
खून के निशान और रस्सियों से बंधे हाथ, ये सब देखकर ही तनाव बढ़ जाता है। सूट वाले शख्स का आगमन ही हीरो वाला था। उसकी आंखों में सिर्फ एक ही लक्ष्य था। मेरे एक्स का माफिया डैडी में ऐसे दृश्य बार-बार देखने को मिलते हैं। बनावट भी काफी उच्च स्तर की लग रही है।
क्या ये प्यार है या बदला? ये उलझन पूरी कड़ी में बना रहता है। चाकू पकड़े हुए लड़के की हंसी में पागलपन साफ झलक रहा था। मेरे एक्स का माफिया डैडी के प्रशंसक को ये कड़ी बहुत पसंद आएगी। हर पल में एक नया राज छिपा हुआ है। देखते रहने का मन करता है।
मारधाड़ वाले दृश्यों की प्रस्तुति बहुत ही असली लग रही थी। न तो ज्यादा धीमा और न ही ज्यादा तेज। बस सही समय पर वार हुआ। मेरे एक्स का माफिया डैडी ने रोमांचक शैली में नया मानक स्थापित किया है। कलाकारों के बीच की मेल भी कमाल की है। हर पल नया तनाव बना रहता है।
अंधेरे कमरे में लालटेन की रोशनी बहुत ही फिल्मी लग रही थी। परछाइयों का खेल देखने लायक था। बंधक बना लड़का बेचारा कुछ कर नहीं पा रहा था। मेरे एक्स का माफिया डैडी की कहानी में गहराई है। सिर्फ मारधाड़ नहीं, जज्बात भी बराबर है। ऐसे कार्यक्रम कम ही देखने को मिलते हैं।
अंत में जब बंदूक सीधी माथे पर लगी, तो सांस रुक गई। खलनायक की आंखों में डर नहीं, चुनौती थी। हीरो की हिम्मत देखते ही बनती थी। मेरे एक्स का माफिया डैडी का अंत हमेशा ऐसा ही धमाकेदार होता है। अगर आप रोमांच पसंद करते हैं तो ये जरूर देखें। बहुत ही शानदार कड़ी है।