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छत पर खड़ी लड़कियों की आँखों में डर साफ़ दिख रहा है। प्लेड शर्ट वाली को चोट लगी है जो कहानी की गहराई बताती है। लौटा जो बादलों से, वहाँ कोई पुराना प्यार नहीं का यह मोड़ बहुत भावुक कर देने वाला है। नीचे खड़े लोग मदद के लिए बेताब हैं पर सुरक्षा घेरा रुकावट बन रहा है। मुख्य पात्र की चिंता उसके चेहरे के हावभाव से झलकती है। ऐसे में जब वह मेगाफोन उठाता है तो उम्मीद की एक किरण जगती है। सस्पेंस बना हुआ है कि आगे क्या होगा।
ग्रे सूट वाले व्यक्ति और काले सूट वाले के बीच की बातचीत में कुछ छिपा है। उनकी आँखों की भाषा बहुत कुछ कह जाती है। लौटा जो बादलों से, वहाँ कोई पुराना प्यार नहीं में किरदारों के बीच का यह संघर्ष देखने लायक है। भीड़ में खड़े लोग सिर्फ तमाशबीन नहीं बल्कि कहानी का हिस्सा लगते हैं। पीली टेप और सुरक्षाकर्मी माहौल को गंभीर बनाते हैं। ऊपर छत पर हवा का बहाव और नीचे की हलचल का कंट्रास्ट बहुत अच्छा बनाया गया है। यह दृश्य मन पर गहरा असर छोड़ता है।
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सुरक्षा घेरे के बाहर खड़े लोगों की उत्सुकता स्वाभाविक लगती है। सब अपने फोन में कैद कर रहे हैं जो आज के दौर की सच्चाई है। लौटा जो बादलों से, वहाँ कोई पुराना प्यार नहीं में इस कैमरे के क्रेज को बहुत बखूबी दिखाया गया है। मुख्य पात्र जब भीड़ को चीरकर आगे बढ़ता है तो उसकी ताकत का अंदाजा होता है। छत पर खड़े लोग अकेले हैं और नीचे दुनिया भर की भीड़ है। यह अकेलापन और भीड़ का विरोधाभास बहुत गहरा है। कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा।
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