जब महारानी बनी सौतेली माँ में सिंहासन पर बैठी महारानी का तेज देखकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लाल पोशाक में खड़ा नया अधिकारी उनकी एक नज़र से कांपने लगता है, और फिर जमीन पर गिरकर माफी मांगता है। दरबार का माहौल इतना तनावपूर्ण है कि सांस लेना भी मुश्किल लगता है। बाद में जब वही अधिकारी घोड़े पर सवार होकर शहर में घूमता है, तो लगता है जैसे उसने कोई बड़ी जीत हासिल की हो। बाजार के दृश्य हंसी-मज़ाक से भरे हैं, जो कहानी में एक ताज़गी लाते हैं।