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Adhi Raat Ka Caller

Mere husband ko estate chhode hue teesra mahina tha, maine koi lover nahi banaya. Main ek gandi phone call ki aadat mein padh gayi jo har raat aadhi raat ko aati thi. Ruko — jis aadmi ki woh depraved voice thi — kya woh mera apna stepson tha?
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इस एपिसोड की समीक्षा

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जुनून की गहराई

इन दोनों के बीच कीमिया देखते ही बनती है। मोमबत्तियों की रोशनी में जो नज़ारा है, वो दिल को छू लेता है। आधी रात का कॉलर ने इस तरह के रोमांस को बहुत खूबसूरती से दिखाया है। हर नज़र में एक कहानी छिपी है जो दर्शकों को बांधे रखती है। माहौल इतना घना है कि सांस रुक सी जाती है। बिल्कुल जादुई अनुभव रहा।

रहस्यमयी कमरा

कमरे की सजावट और पुराना फर्नीचर कहानी का हिस्सा लगता है। अंधेरे और रोशनी का खेल कमाल का है। आधी रात का कॉलर में ऐसे दृश्य बार-बार देखने को मिलते हैं। वो सफेद बालों वाला व्यक्ति क्या लिख रहा था? ये सवाल दिमाग में घूमता रहता है। दृश्य इतने शानदार हैं कि हर पल को संभाल कर रखना चाहें।

खामोश चीखें

नायिका की आंखों में डर और चाहत दोनों साफ दिख रहे हैं। ये सिर्फ शारीरिक नहीं, भावनात्मक खेल है। आधी रात का कॉलर की कहानी में ये गहराई मिलना दुर्लभ है। उसका व्यवहार हावी होने जैसा लगता है पर कुछ नरम भी है। ऐसे संबंध देखना रोचक होता है। बिल्कुल नया अनुभव मिला।

चांदनी और राज

खिड़की से आती चांदनी और कमरे का अंधेरा एक अलग दुनिया बनाते हैं। आधी रात का कॉलर का निर्माण स्तर बहुत ऊंचा है। लगता है जैसे किसी पुराने जमाने की कहानी चल रही हो। कलम से कागज पर लिखने की आवाज़ भी किसी संकेत जैसी लगती है। हर छोटी चीज़ मायने रखती है इस कार्यक्रम में।

तनाव का खेल

बेल्ट को छूने वाला हाथ और फिर वो नज़दीकियां, सब कुछ तनाव से भरा है। आधी रात का कॉलर में ऐसे दृश्य बिना बोझिल हुए पेश किए गए हैं। दर्शक खुद को उस कमरे में महसूस करने लगता है। संगीत और सन्नाटे का मिश्रण सही बैठता है। कहानी आगे क्या मोड़ लेगी, ये जानने की उत्सुकता बढ़ती है।

भावनाओं का साया

जब वो एक दूसरे के करीब आते हैं, तो हवा में कुछ अलग ही होता है। आधी रात का कॉलर ने रोमांस को एक नया आयाम दिया है। सिर्फ कपड़े उतारना नहीं, बल्कि दिलों का खेल दिखाना जरूरी है। यहां वही हुआ है। कलाकारों के अभिनय ने जान डाल दी है। हर पल को जीया जा सकता है।

लिखी हुई तकदीर

वो बुजुर्ग व्यक्ति जो लिख रहा है, क्या वो इनकी तकदीर लिख रहा है? आधी रात का कॉलर में ये रहस्य सबसे बड़ा आकर्षण है। बिस्तर पर चल रहा नज़ारा और बाहर की साजिशें, सब जुड़ा हुआ लगता है। ऐसे कहानी में मोड़ दर्शकों को बांधे रखते हैं। बहुत ही गहराई वाली कहानी लग रही है।

अंधेरे में उजाला

मोमबत्तियों की रोशनी में चेहरों के भाव साफ दिखते हैं। आधी रात का कॉलर का दृश्य संयोजन बहुत प्रशंसनीय है। हर दृश्य को बहुत सोच समझकर लिया गया है। नायिका के गहने और कपड़े भी उस जमाने की कहानी कहते हैं। दृश्य कथा का बेहतरीन उदाहरण है ये कार्यक्रम।

वश में या आज़ाद

क्या वो अपनी मर्जी से है या मजबूरी में? ये सवाल हर दृश्य के बाद उठता है। आधी रात का कॉलर में सत्ता संतुलन को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। उसका हावी होना और नायिका की प्रतिक्रिया, सब कुछ गणना में है। दर्शक खुद ही फैसला नहीं कर पाता कि सच क्या है।

रात का इंतज़ार

पूरी रात का माहौल ऐसा है कि नींद उड़ जाए। आधी रात का कॉलर देखने के बाद यही लगता है कि असली कहानी तो अभी शुरू हुई है। बिस्तर की चादरें और वो ठंडी हवा, सब कुछ महसूस होता है। नेटशॉर्ट्स पर ऐसे कार्यक्रम मिलना सुकून देता है। अगली कड़ी का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा।