इस शो में जादूई पेय का दृश्य बहुत ही रहस्यमयी लगता है। युवती के हाथ में कांपते हुए कांच की शीशी देखकर लगता है कि कुछ गड़बड़ होने वाली है। बुजुर्ग महिला की आंखों में डर साफ झलक रहा था। अपोलो की इंसानी दुल्हन की कहानी में ऐसे मोड़ दर्शकों को बांधे रखते हैं। पुराने मंदिर जैसी मंच सजावट भी कमाल की है। हर दृश्य में एक अलग ही कहानी छिपी हुई लगती है। मुझे यह पौराणिक शैली बहुत पसंद आई है। रहस्य बना हुआ है।
सत्ता और अधीनता के बीच का संघर्ष इस कहानी की जान है। नीली पोशाक वाली महिला का गुस्सा देखकर डर लग रहा था। घुटनों के बल बैठी युवती की आंखों में आंसू किसी का दिल पिघला सकते हैं। अपोलो की इंसानी दुल्हन में भावनात्मक दृश्यों को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। थप्पड़ मारने वाला सीन काफी चौंकाने वाला था। अभिनय इतना असली लगा कि मैं भी रो पड़ी। ऐसे ड्रामे आजकल कम ही देखने को मिलते हैं। दर्शक इससे जुड़ जाते हैं।
जादूई आईने वाला दृश्य मेरा पसंदीदा हिस्सा रहा। बुजुर्ग महिला को अपनी बूढ़ी होती शक्ल देखकर झटका लगा। यह दृश्य दिखाता है कि सुंदरता के पीछे भागना कितना खतरनाक हो सकता है। अपोलो की इंसानी दुल्हन की पटकथा में गहराई है। विशेष प्रभाव का इस्तेमाल भी बहुत सही जगह पर किया गया है। रोशनी और छाया का खेल देखने लायक था। मुझे यह कल्पनाशील दुनिया बहुत भाई है। तकनीक का उपयोग कहानी को मजबूत बनाता है। यह बहुत प्रभावशाली है।
बैंगनी पोशाक वाली रानी का किरदार बहुत प्रभावशाली है। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक और घमंड दिखाई दे रहा था। सोने की तलवार और गहने उसकी ताकत को दर्शाते हैं। अपोलो की इंसानी दुल्हन में खलनायक का किरदार भी उतना ही मजबूत है। कैद हुई युवती की हालत देखकर गुस्सा आ रहा था। कहानी में टकराव साफ दिखाई दे रहा है। यह शो बिल्कुल निराश नहीं करता है। पात्रों की मौजूदगी भारी है।
कैद हुई युवती के कंधों पर नुकीले हथियार देखकर सांस रुक गई थी। उसकी आंखों में डर के साथ ही एक जिद भी साफ झलक रही थी। रक्षक की पकड़ बहुत मजबूत दिखाई दी। अपोलो की इंसानी दुल्हन के हर एपिसोड में नया टेंशन बना रहता है। बागों वाला सेट बहुत सुंदर लग रहा था। पात्रों के बीच की दुश्मनी साफ समझ आ रही है। मुझे अगला भाग देखने की जल्दी है। कहानी आगे बढ़ती जा रही है।
रोने वाले दृश्यों में जो असली दर्द दिखाया गया है वह लाजवाब है। युवती के आंसू पोंछते हुए हाथ कांप रहे थे। यह कमजोरी नहीं बल्कि मजबूरी थी। अपोलो की इंसानी दुल्हन में संवाद कम लेकिन आंखों की बात ज्यादा है। संगीत भी पृष्ठभूमि में बहुत ही उदास लग रहा था। मैंने कई बार इसे वापस जाकर देखा। भावनात्मक लगाव बहुत गहरा बन गया है। यह दिल को छू लेता है। दर्शक भी रो पड़ते हैं। निर्देशन बहुत सटीक है।
प्राचीन वास्तुकला और स्तंभों वाला मंच बहुत भव्य लग रहा था। सूरज की किरणें खिड़कियों से आते हुए बहुत सुंदर दिख रही थीं। अपोलो की इंसानी दुल्हन की छायांकन कला पर काफी मेहनत की गई है। हर कोने में इतिहास महसूस होता है। कपड़ों की सजावट भी उसी युग के अनुसार हैं। यह दृश्य हमें किसी दूसरी ही दुनिया में ले जाता है। दृश्य रूप से बहुत ही समृद्ध अनुभव प्रदान करता है। कला दिशा उत्कृष्ट है।
कहानी में यह साफ नहीं है कि वह शीशी किस काम की है। क्या यह अमृत है या जहर। इसी उलझन ने मुझे बांधे रखा। अपोलो की इंसानी दुल्हन में रहस्य बनाए रखना जानते हैं। युवती की हिचकिचाहट बता रही थी कि वह कुछ छिपा रही है। बुजुर्ग महिला का शक भी जायज लग रहा था। कहानी में मोड़ की उम्मीद बढ़ गई है। मुझे यह अनिश्चितता बहुत पसंद आ रही है। रहस्य बना हुआ है।
सुनहरे गहने और ताज पहने महिला का व्यक्तित्व बहुत भारी था। उसकी आवाज में अधिकार साफ झलक रहा था। सामने खड़ी युवती बहुत छोटी लग रही थी। अपोलो की इंसानी दुल्हन में पात्रों की सजावट बहुत विस्तृत है। बालों की बनावट भी कमाल की थी। रंगों का चयन बहुत सोच समझ कर किया गया है। यह शो कला प्रेमियों के लिए भी अच्छा है। हर बारीकी पर ध्यान दिया गया है।
अंत में जब युवती ने शीशी आगे बढ़ाई तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। सबकी नजरें उसी पर टिकी हुई थीं। अपोलो की इंसानी दुल्हन का अंत बहुत धमाकेदार होने वाला है। मैं यह जानना चाहती हूं कि आखिर होता क्या है। ऐसे शो देखकर ही असली मनोरंजन मिलता है। इस मंच पर यह मिलना सुखद है। कहानी की गति बहुत संतुलित है। अंत की प्रतीक्षा है। हर पल की गिनती हो रही है। यह कहानी लंबी चलनी चाहिए। मुझे बहुत अच्छा लगा।
इस एपिसोड की समीक्षा
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