साइनबोर्ड उठाकर माफ़ी मांगना फिल्मी लग सकता है, पर अलविदा, मेरी लुभावनी पत्नी - ४ में यह इतना दिल छू लेने वाला था कि लगता है जैसे प्यार की नई परिभाषा लिख दी गई हो।
जॉन की आंखों में नमी थी, पर वह अंदर ही अंदर संघर्ष कर रहा था। अलविदा, मेरी लुभावनी पत्नी - ४ में यह द्वंद्व इतना असली लगा कि लगता है जैसे हम भी उसकी जगह होते तो क्या करते।
टूटे हुए परिवार को जोड़ने की कोशिश में वह कितनी टूट गई। अलविदा, मेरी लुभावनी पत्नी - ४ ने दिखाया कि रिश्तों में दरारें कैसे भरती हैं। उसका हर शब्द दिल से निकला हुआ लग रहा था।
उसकी आंखों से बहते आंसू और कांपती आवाज़—अलविदा, मेरी लुभावनी पत्नी - ४ का यह दृश्य इतना इमोशनल था कि मैं भी रो पड़ा। कभी-कभी माफ़ी मांगना सबसे बड़ा साहस होता है।
जॉन के सामने घुटनों पर बैठकर साइनबोर्ड उठाने वाला दृश्य दिल को छू गया। अलविदा, मेरी लुभावनी पत्नी - ४ में भावनाओं का यह विस्फोट इतना तीव्र था कि लगता है जैसे स्क्रीन के पार से आंसू बह रहे हों। उसकी आंखों में पछतावा और उम्मीद दोनों झलक रहे थे।