जिस पल वो मास्क पहने शख्स कमरे में घुसा, माहौल में सनसनी दौड़ गई। उसकी चाल और आँखों में छिपा गुस्सा साफ दिख रहा था। जंटर का मिटी फिस्ट में ऐसे विलेन की एंट्री देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वो जमीन पर पड़े आदमी को देखकर मुस्कुरा रहा था, जो बताता है कि उसका इरादा कुछ और ही है। डर और सस्पेंस का बेहतरीन मिश्रण।
वो लड़की जो कोने में खड़ी थी, उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। जंटर का मिटी फिस्ट के इस सीन में वो सिर्फ एक दर्शक नहीं, बल्कि कहानी का अहम हिस्सा लग रही थी। उसकी पोशाक और गहने बता रहे थे कि वो साधारण नहीं है। उसका रिएक्शन देखकर लगता है कि वो कुछ जानती है।
जो आदमी जमीन पर पड़ा था, उसके चेहरे पर साफ डर झलक रहा था। वो बार-बार मास्क वाले की तरफ देख रहा था, जैसे उसे अपनी मौत नजर आ रही हो। जंटर का मिटी फिस्ट में ऐसे सीन्स दर्शकों को बांधे रखते हैं। उसकी हालत देखकर लगता है कि उसने कुछ बहुत बड़ी गलती कर दी है। उसकी आँखों में माफी मांगने का भाव था, लेकिन शायद अब बहुत देर हो चुकी थी।
वो शख्स जो काली टी शर्ट में था, उसकी मौजूदगी में एक अलग ही ताकत थी। वो न तो डरा और न ही घबराया। जंटर का मिटी फिस्ट में ऐसे किरदार ही हीरो होते हैं जो मुश्किल वक्त में भी शांत रहते हैं। उसकी आँखों में एक अजीब सा आत्मविश्वास था। वो मास्क वाले से टकराने के लिए तैयार लग रहा था। उसकी बॉडी लैंग्वेज बता रही थी कि वो अकेला नहीं है।
वो चांदी जैसा मास्क सिर्फ एक सजावट नहीं, बल्कि एक पहचान थी। जंटर का मिटी फिस्ट में ऐसे मास्क पहनने वाले अक्सर अपने चेहरे छिपाते हैं ताकि उनका असली चेहरा कोई न देख सके। उस मास्क पर बनी नक्काशी बता रही थी कि वो किसी खास ग्रुप से ताल्लुक रखता है। उसकी मुस्कान में एक खतरनाक इरादा छिपा था। वो सिर्फ डराने नहीं, बल्कि सबक सिखाने आया था।