सफेद पोशाक पहने युवक की आँखों में जो आग है, वो किसी भी चोट से नहीं बुझ रही। काले कवच वाले दुश्मन के हमले के बाद भी वो बार-बार उठ खड़ा होता है। जेनिटर का माइटिफिस्ट में ऐसे दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसकी हर सांस में बदले की आग साफ दिख रही है, और दर्शक के रूप में हम बस यही चाहते हैं कि वो जीत जाए।
काली पोशाक में बैठे उस बूढ़े व्यक्ति के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान है। चाहे लड़ाई कितनी भी खूनी क्यों न हो जाए, वो शांत बैठे रहते हैं। जेनिटर का माइटिफिस्ट की कहानी में इनका किरदार सबसे ज्यादा गहरा लग रहा है। लगता है जैसे ये सब कुछ पहले से जानते हों और बस एक बड़े खेल का हिस्सा हों जो अभी शुरू हुआ है।
जब काले कवच वाले ने हरे रंग का धुआं छोड़ा, तो पूरा माहौल बदल गया। ये कोई आम मार्शल आर्ट्स नहीं, बल्कि कुछ जादुई शक्तियों का खेल लग रहा है। जेनिटर का माइटिफिस्ट में एक्शन के साथ-साथ फैंटेसी का तड़का भी बहुत अच्छा लगा। सफेद पोशाक वाले को उस धुएं से बहुत नुकसान हुआ, अब देखना है वो कैसे वापसी करता है।
चोटी वाली लड़की के चेहरे पर हर पल बढ़ती चिंता साफ दिख रही है। वो सफेद पोशाक वाले युवक को लेकर बहुत परेशान है, शायद वो उसकी बहन या प्रेमिका हो। जेनिटर का माइटिफिस्ट में इमोशनल एंगल भी बहुत अच्छे से दिखाया गया है। उसकी आँखों में आंसू और डर देखकर दर्शक का दिल भी पसीज जाता है।
भूरे रंग के साधारण कपड़े पहने उस व्यक्ति को सब अनदेखा कर रहे हैं, लेकिन उसकी आँखों में एक अलग ही चमक है। जेनिटर का माइटिफिस्ट में शायद यही वो छिपा हुआ हीरो है जो अंत में सबको चौंका देगा। वो बार-बार घड़ी की तरफ देख रहा है, शायद कोई समय सीमा खत्म होने वाली है और फिर असली खेल शुरू होगा।