उसके आंसू देख कर दिल टूट गया, सच में एक्टिंग बहुत जबरदस्त थी और रियल लगी। सूट वाले आदमी का बिहेवियर बहुत कोल्ड था, लगता है वो कोई बड़ा साइंटिस्ट या बॉस है जिसको कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरा परफेक्ट एंड्रॉयड का ये सीन बहुत इमोशनल था और मुझे रोने पर मजबूर कर दिया पूरी तरह से। लैब का सेटिंग अमेजिंग लगा, फ्यूचर जैसा फील आया देखने में। मुझे उस लड़की के लिए बहुत बुरा लगा जो चिल्लाती रही पर किसी ने नहीं सुना उसकी बात। सिक्योरिटी गार्ड्स ने जबरदस्ती ले गए, बहुत दुख हुआ ये देख कर। कहानी में अब बड़ा ट्विस्ट होने वाला है, इंतज़ार नहीं हो रहा है मुझसे।
सूट वाले शख्स की आंखों में कोई रहम नहीं था, बिल्कुल पत्थर जैसा दिल लगता है उसका। उसने बिना सोचे समझे ऑर्डर दे दिया जो बहुत क्रूर था और गलत था। वो लड़की कितनी बेचारी थी, अपने प्यारे के लिए लड़ रही थी पर हार गई अंत में। पॉड में लेटा हुआ इंसान कौन है? ये सवाल दिमाग में घूम रहा है रात भर। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का मजा अलग है, क्वालिटी बहुत अच्छी थी और स्ट्रीम स्मूथ चला। सीन के अंत में जो हुआ वो अनएक्सपेक्टेड था, सिक्योरिटी ने पकड़ लिया। अब अगली कड़ी में क्या होगा ये जानना जरूरी है मेरे लिए।
मेरा परफेक्ट एंड्रॉयड ने मुझे हिला कर रख दिया है, इतना इमोशनल सीन कम ही देखा है मैंने। वो लड़की जब गिर गई थी ना, तब लगा सब खत्म हो गया पर उसने हिम्मत नहीं हारी। पर उसकी आंखों में अभी भी उम्मीद थी जो देख कर लगा वो वापस आएगी। लैब की डॉक्टर चुप चाप सब देख रही थी, उसकी भूमिका क्या है कहानी में? मुझे लगता है वो भी कुछ छुपा रही है बॉस से। सूट वाले बॉस को सब कंट्रोल करना पसंद है, उसकी शारीरिक भाषा से साफ था। ये शक्ति संतुलन बहुत इंटरेस्टिंग है और देखने लायक है। दृश्य प्रभाव भी काफी उच्च स्तर के थे, बजट लगा होगा।
सिक्योरिटी गार्ड्स का प्रवेश सीन को और इंटेंस बना दिया, बिल्कुल एक्शन फिल्म जैसा फील आया। ब्लैक सूट और चश्मा, क्लासिक खलनायक लुक जो डर पैदा करता है। लड़की को घसीटने का तरीका बहुत रफ था, इंसानियत मर गई लगती है। क्या वो पॉड वाला इंसान बच पाएगा? ये सस्पेंस बना हुआ है दिमाग में। बैकग्राउंड म्यूजिक भी बहुत सूट कर रहा था स्थिति को, टेंशन बढ़ा दिया। मैंने पहले कभी ऐसा विज्ञान कल्पना नाटक नहीं देखा था जो इतना कनेक्ट करे। एक्टिंग नेचुरल लगी, कोई अतिरंजित अभिनय नहीं था जो अक्सर होती है। निर्देशक ने अच्छा काम किया है इस कड़ी में, प्रशंसा बनता है।
सफेद शर्ट वाली लड़की की एक्टिंग डिजर्व करती है पुरस्कार, इतनी मेहनत दिखी पर्दे पर। रोने का सीन बिल्कुल रियल लगा, नकली आंसू नहीं थे। आंसू पोंछते वक्त हाथ कांप रहे थे जो दिखाया गया वो विस्तार अच्छी थी। सूट वाले आदमी ने मुस्कान किया था अंत में, वो बहुत भयावह था और डर लगा। उसको लगता है वो जीत गया है पर गलत कर रहा है। पर कहानी अभी शुरू हुई है, अभी तो असली खेल होगा। मेरा परफेक्ट एंड्रॉयड की कहानी की पटकथा जटिल है और समझने में मजा आता है। हर पात्र के पास एक राज है जो धीरे धीरे खुल रहा है। मुझे ये राज जाने हैं अभी, इंतज़ार मुश्किल है।
लैब का डिजाइन बहुत भविष्यवादी था, बिल्कुल अंतरिक्ष स्टेशन जैसा फील आया। लाइट्स और मशीनें सब उन्नत तकनीक लग रहे थे, निर्माण मूल्य अच्छी है। पॉड जैसा उपकरण किसके लिए है? शायद उस बेचारे के लिए जो लेटा हुआ है और हिल भी नहीं पा रहा। उसकी हालत देख कर तरस आया, वो कुछ कर नहीं सकता था। तार और केबल फर्श पर बिखरे थे, अव्यवस्था का प्रतीक था जो स्थिति को दिखाता है। कैमरा कोण ने टेंशन को हाईलाइट किया बहुत अच्छे से। क्लोज अप शॉट में भावनाएं साफ दिखे, कोई डिटेिल मिस नहीं हुई। ये श्रृंखला मुझे पसंद आ रही है और रोज देख रहा हु। लगातार देखने का मन कर रहा है पूरे सप्ताहांत में।
बॉस और डॉक्टर के बीच की खामोशी बहुत कुछ कहती थी, बिना बोले बात हो रही थी। दोनों एक दूसरे को जानते हैं लगता है पुराने साथी हैं। क्या वो दोनों साथी हैं अपराध में? या डॉक्टर मजबूर है इस सब में? लड़की को ले जाते वक्त उसने कुछ कहा नहीं, बस चुप चाप देखती रही सब कुछ। ये रहस्य और बढ़ गई है दिमाग में। मेरा परफेक्ट एंड्रॉयड में हर सीन में नया मोड़ है जो झटका करता है। मुझे लगता है डॉक्टर मदद करेगी बाद में लड़की की। आशा यही होती है क्योंकि वो अच्छी लग रही थी और उसकी आंखों में दर्द था।
जब वो लड़की जमीन पर गिरी थी, तब संगीत रुक गया था अचानक। ये खामोशी बहुत शक्तिशाली था और सीन को भारी बना दिया। फिर गार्ड ने उठाया और ले गए जोर से। उसके चेहरे पर डर और गुस्सा दोनों था मिक्स हो कर। सूट वाले ने जैकेट ठीक की थी, उससे लगा वो बेफिक्र है और राजा है। उसको कोई फर्क नहीं पड़ता दूसरों के दर्द से, स्वार्थी है वो। ये पात्र नकारात्मक है पर रोचक है देखने में। खलनायक हमेशा यादगार होने चाहिए कहानी में। ये वाला भूमिका वैसा ही है, नफरत भी होती है और जिज्ञासा भी।
पॉड के अंदर वाले इंसान की सांसें चल रही थीं या नहीं? मॉनिटर पर रेखाएं दिखीं जो हिल रही थीं। शायद वो जिंदा है पर कोमा में है और कुछ कर नहीं सकता। लड़की उससे बचाना चाहती थी पूरी ताकत से। पर बॉस ने मना कर दिया और नियम फॉलो किया। ये संघर्ष बहुत पुराना है शक्ति का, पर नये तरीके से दिखाया गया है। विज्ञान कल्पना और भावना का मिश्रण अच्छा है जो बोर नहीं करता। मेरा परफेक्ट एंड्रॉयड ने ये संतुलन बना के रखा है बहुत अच्छे से। मुझे ये शैली बहुत पसंद है और मैं इसका प्रशंसक बन गया हु। ऐसे ही और कड़ियां चाहिए जल्दी से।
अंत में दरवाजा बंद हुआ तो लगा कहानी का एक अध्याय समाप्त हो गया अभी के लिए। पर ये तो शुरुआत थी असली नाटक की, अभी तो मजा आएगा। लड़की वापस आएगी बदला लेने या उससे बचाने। उसकी आंखों में वो चमक थी जो हार नहीं मानती। सूट वाले को सावधान रहना चाहिए अब से। क्योंकि प्यार में पागल इंसान कुछ भी कर सकता है हद से गुजर कर। ये संवाद याद आ रहा है पुरानी फिल्मों का। समग्र अनुभव बहुत अच्छा रहा देखने में। पटकथा कसदार थी और तेज थी। कोई बेकार सीन नहीं था बर्बाद समय करने वाला। सब कुछ उद्देश्य से था और कहानी आगे बढ़ा रहा था।
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