शुरुआत में ही एक लड़की ज़ख्मी हालत में ज़मीन पर गिरी हुई थी और सूट वाले व्यक्ति का चेहरा गुस्से से लाल था। उसने मोबाइल पर किसी को डांटा और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। लेकिन जब पिंक ड्रेस वाली लड़की ने वो सुनहरा फीनिक्स हेयरपिन दिखाया, तो सब कुछ बदल गया। स्लैप क्वीन का गुस्सा में ऐसे ट्विस्ट देखकर दिल ज़ोर से धड़कने लगता है। आखिर वो हेयरपिन किसके पास था और असली ताकतवर कौन है? ये जानने के लिए मैं अगला भाग देखने को बेचैन हूँ।
पिंक ड्रेस वाली लड़की के हाथ में वो कीमती फीनिक्स का आभूषण देखकर सूट वाले मालिक की हवा निकल गई। पहले वो कितना गुस्सा दिखा रहा था, और फिर अचानक से उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। ये ताकत का संतुलन बहुत ही रोचक लगा मुझे। स्लैप क्वीन का गुस्सा की कहानी में ये हेयरपिन किसी पहचान की निशानी लगता है। क्या वो लड़की किसी बड़ी फैमिली से है? पृष्ठभूमि में हॉस्पिटल का दृश्य था जो तनाव और बढ़ा रहा था। दृश्य बहुत शार्प हैं और अभिनय भी ज़बरदस्त है।
बड़े हॉस्पिटल के बाहर ये सब नाटक हो रहा था जो कि बहुत ही नाटकीया लगा। एक लड़की बेहोश पड़ी थी और दूसरी लड़की हैरान खड़ी थी। बीच में सूट वाले आदमी का मोबाइल कॉल वाला दृश्य बहुत तेज़ था। उसने उंगली उठा कर किसी को धमकी दी जो कि उसकी ताकत को दिखाता है। स्लैप क्वीन का गुस्सा में हर दृश्य में एक नया रहस्य मिलता है। मुझे ये समझ नहीं आ रहा कि ज़ख्मी लड़की का उस हेयरपिन वाली लड़की से क्या संबंध है। क्या ये दोनों बहन हैं?
सूट वाले व्यक्ति का भाव देखकर लग रहा था कि वो बहुत परेशान है। उसने ज़मीन पर गिरी लड़की को देखा और फिर मोबाइल पर चिल्लाया। लेकिन जब उसने वो सुनहरा गहना देखा, तो उसका रंग बदल गया। डर और इज़्ज़त का ये मिश्रण बहुत अच्छे से दिखाया गया है। स्लैप क्वीन का गुस्सा में भावनाओं की सीमा बहुत विशाल है। पिंक ड्रेस वाली लड़की का आत्मविश्वास देखकर लगता है कि वो अब खेल बदल देगी। अब आगे क्या होगा ये देखना बाकी है।
वो सुनहरा फीनिक्स हेयरपिन सिर्फ एक सजावट नहीं लग रहा था, बल्कि कहानी की कुंजी था। जैसे ही पिंक ड्रेस वाली लड़की ने इसे दिखाया, माहौल बदल गया। सूट वाले मालिक ने अपना मोबाइल बंद किया और हैरान रह गया। ये क्षण स्लैप क्वीन का गुस्सा का सबसे बेहतरीन मोड़ था। मुझे लगा कि अब वो लड़की संकट में है, पर उल्टा वो ही नियंत्रण में आ गई। पृष्ठ संगीत और दृश्य कोण ने इस दृश्य को और भी नाटकीया बना दिया था। बहुत ही बढ़िया निर्माण गुणवत्ता है।
एक लड़की ज़ख्मी और बेहोश, दूसरी लड़की स्वस्थ और आत्मविश्वासी। दोनों के बीच का अंतर बहुत रोचक था। सूट वाले आदमी ने पहले ज़ख्मी लड़की की तरफ ध्यान दिया, पर बाद में दूसरी लड़की के आगे झुक गया। ये ताकत बदलाव बहुत तेज़ था। स्लैप क्वीन का गुस्सा की लेखन में ये बराबरी नहीं दिखाई गई है। मुझे ये जानने की उत्सुकता है कि ज़ख्मी लड़की को चोट कैसे लगी। क्या ये किसी साजिश का हिस्सा था? हर फ्रेम में कुछ ना कुछ नया है।
पहले सूट वाला मालिक कितना क्रोधित लग रहा था, चिल्लाता हुआ मोबाइल पर बात कर रहा था। उसने उंगली उठा कर किसी को चेतावनी दी थी। लेकिन फीनिक्स हेयरपिन देखते ही वो शांत और प्रसन्न हो गया। ये परिवर्तन बहुत ही हास्यास्पद और चौंकाने वाला था। स्लैप क्वीन का गुस्सा में ऐसे पात्र हैं जो पलट जाते हैं। पिंक ड्रेस वाली लड़की की आंखों में जो चमक थी, वो उसकी जीत थी। अब वो मालिक को नियंत्रित कर रही है। ये देखकर मज़ा आ गया।
ज़मीन पर गिरी लड़की के चेहरे पर खून था और वो हिल नहीं रही थी। ये दृश्य देखकर दिल दुखी हो गया। लेकिन कहानी में तुरंत मोड़ आ गया जब दूसरी लड़की सामने आई। सूट वाले व्यक्ति ने नाड़ी चेक की और फिर हैरान हुआ। स्लैप क्वीन का गुस्सा में ट्रैजेडी और रहस्य का मिश्रण बहुत अच्छा है। मुझे लगता है कि ये सब योजना थी। पिंक ड्रेस वाली लड़की को सब कुछ पता था। ये रहस्य बनाए रखता है दर्शकों को।
पिंक ड्रेस वाली लड़की ने बिना डरे सूट वाले मालिक से बात की। उसके हाथ में वो कीमती वस्तु थी जिसने सबका ध्यान खींच लिया। उसके चेहरे पर आत्मविश्वास था और वो मुस्कुरा भी रही थी। स्लैप क्वीन का गुस्सा में महिला पात्र बहुत मज़बूत हैं। उसने मालिक को मोबाइल पर बात करते हुए देखा और फिर अपनी बात रखी। ये दृश्य दिखाता है कि धन और ताकत सब कुछ नहीं होती। कहानी में गहराई है जो दर्शकों को बांध कर रखती है।
भाग के अंत तक बहुत सारे प्रश्न खड़े हो गए हैं। वो ज़ख्मी लड़की कौन थी? हेयरपिन वाली लड़की कौन है? सूट वाला मालिक किसके लिए काम करता है? स्लैप क्वीन का गुस्सा ने हमें अधूरे अंत पर छोड़ दिया है। हॉस्पिटल के बाहर ये सब होना और लोगों का आना जाना, सब कुछ यथार्थ लगा। मुझे अगला भाग देखने की जल्दी है क्योंकि कहानी अभी शुरु हुई है। दृश्य और अभिनय ने मुझे पूरा जोड़े रखा था। बहुत ही रोमांचक श्रृंखला है ये।
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