कार के अंदर की खामोशी इतनी भारी है कि सांस लेने में भी डर लगता है। वो लड़का सूट में कितना परफेक्ट लग रहा है, पर उसकी आंखों में एक अजीब सी बेचैनी है। लड़की की चुप्पी सब कुछ कह रही है, जैसे वो किसी टूटे हुए वादे को याद कर रही हो। रात के शहर की रोशनी उनके चेहरों पर पड़ रही है, और हर फ्रेम में एक नया दर्द उभरता है। आ गया मिस्टर राइट की ये सीन देखकर लगता है कि कभी-कभी सही इंसान भी गलत वक्त पर आ जाता है। ड्राइविंग सीट पर बैठे हुए भी वो दोनों एक-दूसरे से कितने दूर हैं।