इस दृश्य में जब वह लड़की खून से सने होठों के साथ रिक्शे पर बैठी थी, तो दिल दहल गया। रिक्शा चलाने वाले की आंखों में चिंता साफ दिख रही थी। गाड़ीवान का रहस्य नामक इस कार्यक्रम में ऐसे भावनात्मक पल बार-बार देखने को मिलते हैं। उसका अंगूठा दिखाकर हिम्मत बढ़ाना बहुत प्यारा लगा। लगता है इन दोनों के बीच कोई गहरा रिश्ता है जो अभी खुलकर सामने आएगा। दर्शक के रूप में मैं इस जोड़ी का समर्थन कर रहा हूं।
रात के समय जलते हुए घर का दृश्य बहुत ही डरावना और दुखद था। छोटी बच्ची की चीखें सुनकर रोंगटे खड़े हो गए। राजीव वर्मा का किरदार उस वक्त वहां क्यों था, यह सवाल दिमाग में घूम रहा है। गाड़ीवान का रहस्य की कहानी में यह भूतकाल का दृश्य बहुत अहम भूमिका निभा रहा है। लगता है उस आग ने इनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। अब बड़ी होकर वह लड़की बदला लेने आई है या सच जानने।
जब वह काले कपड़े वाला व्यक्ति लाल लिफाफा लेकर आया, तो सब हैरान रह गए। उस पर विवाह का जिक्र था। क्या सच में यह शादी की रस्म है या कोई साजिश? सफेद पोशाक वाली लड़की की आंखों में आंसू और हैरानी साफ झलक रही थी। गाड़ीवान का रहस्य में ऐसे मोड़ की उम्मीद नहीं थी। रिक्शा वाले लड़के की प्रतिक्रिया भी देखने लायक थी। अब आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।
डायलॉग कम थे लेकिन अभिनय बहुत गहरी थी। जब उस लड़के ने अपनी गर्दन खुजाई और हैरानी जताई, तो लगा वह कुछ छुपा रहा है। लड़की की कमजोर हालत के बाजूद भी वह चलने की कोशिश कर रही थी। गाड़ीवान का रहस्य की यह खासियत है कि यह बिना शोर मचाए कहानी आगे बढ़ाता है। मंच सजावट और कपड़े भी उस जमाने के बिल्कुल सही लग रहे हैं। मुझे यह ऐतिहासिक नाटक बहुत पसंद आ रहा है।
सिंह-बाघ रक्षक दल के गेट पर जब दोनों पहुंचे, तो माहौल बदल गया। वहां खड़े लोग किसी इंतजार में लग रहे थे। राजीव वर्मा का परिचय जैसे ही हुआ, कहानी में नया मोड़ आया। गाड़ीवान का रहस्य में अब रोमांच और नाटक दोनों बढ़ने वाले हैं। उस लड़की को सहारा देकर चलाना बहुत भावनात्मक सीन था। लगता है अब यह जगह इनके लिए सुरक्षित होगी या फिर नई मुसीबतें खड़ी होंगी।
नज़दीकी दृश्य में उस लड़की की आंखों में जो दर्द था, वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। खून का निशान और मासूमियत का मिश्रण दिल को छू गया। रिक्शा वाले लड़के की मदद करना दिखाता है कि वह अकेली नहीं है। गाड़ीवान का रहस्य की कहानी धीरे-धीरे खुल रही है। मुझे लगता है कि यह लाल लिफाफा किसी बड़े राज की चाबी है। ऐसे सीन देखकर ही तो हम नाटक देखना पसंद करते हैं।
बचपन का वह दृश्य जब वह पिता के पास खड़ी थी, सब कुछ बदलने वाला था। आग लगने के बाद की खामोशी बहुत भारी लग रही थी। अब बड़ी होकर वह उसी जगह वापस आई है। गाड़ीवान का रहस्य में समय के दो पहलू दिखाए गए हैं। रिक्शा वाले के कपड़े और उसकी बोलचाल से लगता है वह साधारण नहीं है। यह कहानी कहां जाएगी, यह अनुमान लगाना मुश्किल है।
सब कुछ जल जाने के बाद भी उस लड़की ने हार नहीं मानी। उसका अंगूठा दिखाकर हां कहना बहुत मायने रखता था। शायद यह भरोसे का इशारा था। गाड़ीवान का रहस्य में उम्मीद और निराशा का खेल चल रहा है। जब वह लिफाफा खुला, तो अंदर लिखे शब्दों ने सबको चौंका दिया। यह शादी का प्रस्ताव है या कोई और दस्तावेज, यह तो आगे पता चलेगा। मुझे यह रहस्य पसंद है।
राजीव वर्मा के चेहरे पर जो मुस्कान थी, वह थोड़ी संदिग्ध लग रही थी। उसने लिफाफा देते वक्त जो अंदाज अपनाया, उससे लगता है वह सब कुछ योजना बना रहा है। गाड़ीवान का रहस्य में खलनायक कौन है, यह अभी साफ नहीं है। सफेद कपड़े वाली लड़की अब उसकी चाल में फंस सकती है। रिक्शा वाला लड़का उसे बचा पाएगा या नहीं, यह देखना बाकी है। कहानी में जान है।
इस मंच पर मिलने वाली सामग्री में यह सबसे बेहतरीन लग रहा है। अभिनय से लेकर छायांकन तक सब कुछ शानदार है। गाड़ीवान का रहस्य ने मुझे शुरू से अंत तक बांधे रखा। खासकर वह सीन जब वह लड़की रिक्शे से उतरकर चलने की कोशिश कर रही थी। ऐसे ही और कड़ियों की उम्मीद है। अगर आप ऐतिहासिक नाटक पसंद करते हैं तो यह जरूर देखें। मजा आ गया।