अग्नि मल्होत्रा का ड्रैगन से मुकाबला देखकर रोंगटे खड़े हो गए। जब वह हवा में उड़कर नीचे आया, तो लगा जैसे कोई देवता उतरा हो। इस कार्यक्रम लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में एक्शन दृश्य बहुत शानदार हैं। पुराने बाबा की मदद करना उसकी बहादुरी दिखाता है। हर पल रोमांच से भरा है और दर्शक बंधे रहते हैं। कहानी की रफ़्तार बहुत तेज है।
सूर्यास्त के समय अग्नि और प्रिया का संवाद बहुत भावुक था। पहाड़ी पर खड़े होकर उन्होंने जो वादा किया, वह दिल को छू गया। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय कहानी में यह रिश्ता सबसे खास है। प्रिया का उड़कर जाना थोड़ा दुखी करता है। पर उनकी दोस्ती अमर है और हमेशा रहेगी। पृष्ठभूमि का संगीत भी मधुर था।
सरिता वर्मा का पर्दे में आना बहुत रहस्यमयी लगा। सब उसे देखकर हैरान थे और शांत हो गए। रोहन मल्होत्रा की मुस्कान में छिरी चालाकी साफ दिख रही थी। इस कार्यक्रम लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में हर किरदार के अपने राज हैं। सफेद कपड़े और वह नकाब बहुत सुंदर लग रहा था सबको। उसकी आंखें बहुत बातें कर रही थीं।
रोहन और अग्नि के बीच की प्रतिद्वंद्विता देखने लायक है। दोनों भाई हैं पर रास्ते अलग हैं और सोच भी। जब अग्नि ग्लाइडर से उतरा, तो सबकी सांसें रुक गईं। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में यह ट्विस्ट बहुत अच्छा था। भीड़ का शोर और उनका सामना देखकर मजा आ गया सबको। अंत कौन जीतेगा यह देखना है।
ड्रैगन के आग उगलने के दृश्य बहुत भव्य थे और डरावने। तीन लोग डर के मारे कांप रहे थे और गिर गए। तभी अग्नि की एंट्री हुई और सब बदल गया एक पल में। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय के दृश्य प्रभाव कमाल की हैं। जादू की शक्तियों का उपयोग बहुत रचनात्मक तरीके से दिखाया गया है यहाँ। आग और धुएं का खेल अच्छा था।
प्रिया मुरवजी की शक्तियां देखकर लगता है वह अग्नि की गुरु ही नहीं, साथी भी हैं। जब वह हवा में तैरती हुई गई, तो नज़ारा अद्भुत था। इस कार्यक्रम लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में महिला किरदार बहुत मजबूत हैं। उनकी आंखों में छिपा दर्द साफ झलक रहा था सबको। उनका त्याग बहुत बड़ा है।
बूढ़े बाबा की हालत देखकर तरस आया और दुख हुआ। खून से लथपथ चेहरा और फिर अग्नि से उम्मीद जुड़ी थी। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में भावनात्मक पल भी हैं। जब अग्नि ने उन्हें बचाया, तो राहत मिली सबको। ऐसे दृश्य कहानी को गहराई देते हैं और जोड़ते हैं। बुजुर्गों का सम्मान दिखता है।
सभा में सबकी भीड़ और फिर सरिता का आगमन हुआ। विलोवर कार्यकर्ता भी हैरान रह गया और चुप रहा। रोहन मल्होत्रा का अंदाज बहुत घमंडी लग रहा था सबको। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में हर कड़ी नया मोड़ लाती है। यह मुकाबला आगे कैसे बढ़ेगा, यह देखना बाकी है अभी। सस्पेंस बना हुआ है।
अग्नि का ग्लाइडर वाला दृश्य थोड़ा अलग था और नया। आम जादू नहीं, कुछ तकनीकी भी लग रहा था सबको। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में ऐसे नए प्रयोग अच्छे लगते हैं। उसकी आंखों में गुस्सा और ठान ली हुई जिद साफ दिख रही थी। सबको चौंकाने का उसका अंदाज लाजवाब है यहाँ। वह हीरो लग रहा था।
कुल मिलाकर यह कहानी बहुत रोचक है और पसंद आई। ड्रैगन से लेकर परिवार की दुश्मनी तक सब कुछ है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय को इस माध्यम पर देखना बनता है। हर किरदार अपनी जगह सही है और निभा रहा है। अंत में सूरज ढलने का दृश्य बहुत सुकून देने वाला था सबको। सीजन का इंतज़ार रहेगा।