जब उसने कवच पहना और भारी भाला उठाया, तो सबकी सांसें थम गईं। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा दमदार है। लड़कियां पहले तो डरीं, फिर हैरान हुईं, और अंत में उसकी ताकत पर गर्व महसूस किया। खाने के दौरान जो मजाक और प्यार दिखा, वह दिल को छू गया।
सबने सोचा था कि बस युद्ध का अभ्यास देखेंगे, पर असली नाटक तो डिनर टेबल पर हुआ। जब उसने हरी पोशाक वाली लड़की को गोद में उठाया, तो बाकी सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट में ऐसे मोड़ आते हैं जो आपको हंसाते भी हैं और रुलाते भी।
जब वह भाला उठा रहा था, तो गुलाबी साड़ी वाली लड़की की आंखों में चिंता साफ दिख रही थी। शायद उसे डर था कि कहीं उसे चोट न लग जाए। बाद में खाने के समय जब वह चुपचाप बैठी रही, तो लगा कि उसके दिल में कुछ चल रहा है। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट में हर चेहरे की अपनी कहानी है।
लकड़ी के दरवाजे से निकलते ही उसका रूप बदल गया। साधारण कपड़ों से कवच तक का सफर देखकर लगता है कि वह किसी बड़ी जिम्मेदारी की ओर बढ़ रहा है। फिर भी, जब वह लड़की को गोद में उठाकर हंसा, तो लगा कि युद्ध भी प्यार के आगे हार मान जाता है। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट का यह अंदाज बेमिसाल है।
पहले तो वह भाले से हवा चीर रहा था, और कुछ ही देर में वह लड़की को गले लगाकर हंसा रहा था। यह बदलाव इतना स्वाभाविक था कि लगा जैसे यही जीवन का सच हो। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट में ऐसे दृश्य हैं जो आपको याद दिलाते हैं कि ताकतवर होने का मतलब पत्थर दिल होना नहीं है।