इस दृश्य में काले कवच पहने युवक की आँखों में एक अजीब सी चमक है। जब वह दूसरे सिपाही का हाथ पकड़ता है, तो लगता है जैसे कोई जादू हो रहा हो। धुएं का निकलना और सिपाही का दर्द से कराहना देखकर रोंगटे खड़े हो गए। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट में ऐसे पल ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं। बैकग्राउंड में खड़े सैनिकों के चेहरे पर डर और हैरानी साफ दिख रही थी।
प्राचीन दीवारों के बीच खड़े इन सैनिकों के बीच जो तनाव है, वह स्क्रीन पर साफ झलक रहा है। लाल और काले कवच वाले सिपाहियों के बीच की दुश्मनी हवा में तैर रही है। जब मुख्य पात्र मुस्कुराता है, तो लगता है उसने कोई बड़ी चाल चल दी है। साम्राज्य का सम्राट बनने की राह में ऐसे मोड़ ही तो कहानी को रोमांचक बनाते हैं। हर चेहरे पर अलग-अलग भावनाएं पढ़ी जा सकती हैं।
जब काले कवच वाले योद्धा के हाथ से सफेद धुआं निकलता है, तो लगता है जैसे कोई अलौकिक शक्ति जागृत हो गई हो। यह दृश्य गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट की सबसे यादगार सीन में से एक है। दर्द से तड़पते सिपाही और शांत खड़ा मुख्य पात्र - यह विरोधाभास बहुत प्रभावशाली है। ऐसे पल देखकर लगता है कि इस कहानी में अभी बहुत कुछ होने वाला है।
इस दृश्य में सैनिकों के बीच की वफादारी और विश्वास की परीक्षा होती दिख रही है। जब एक सिपाही को पकड़कर रखा जाता है, तो बाकी सैनिकों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं। कुछ हैरान हैं, कुछ डरे हुए हैं, तो कुछ गुस्से में हैं। साम्राज्य का सम्राट बनने की इस लड़ाई में हर कोई अपनी-अपनी भूमिका निभा रहा है। मुख्य पात्र की शांत मुस्कान सब कुछ कह जाती है।
इस दृश्य में प्राचीन युद्ध कौशल और जादुई शक्तियों का अनोखा संगम देखने को मिलता है। काले कवच वाले योद्धा की हर हरकत में एक रहस्य छिपा है। जब वह दूसरे सिपाही को छूता है, तो लगता है जैसे उसकी जीवन शक्ति सोख रहा हो। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट में ऐसे दृश्य ही तो दर्शकों को हैरान कर देते हैं। पृष्ठभूमि में खड़े सैनिकों की प्रतिक्रियाएं भी बहुत प्राकृतिक लग रही हैं।