नीलामी हॉल की चमक-धमक में जब वह जोड़ा प्रवेश करता है, तो माहौल में एक अजीब सी तनावपूर्ण खामोशी छा जाती है। ग्रे सूट वाला व्यक्ति अपनी आँखों से कुछ छिपा रहा है, जबकि काले ड्रेस वाली महिला के चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान है। जैसे-जैसे नीलामी आगे बढ़ती है, इन दोनों के बीच की दूरियाँ और नज़दीकियाँ साफ़ झलकती हैं। यह सिर्फ एक नीलामी नहीं, बल्कि दिलों की बोली लगने का मंच है। छह साल बाद: मजदूर से प्रेम, देवी का विवाह प्रस्ताव जैसे मोड़ यहाँ भी महसूस होते हैं, जहाँ पुराने रिश्ते नए अंदाज़ में सामने आते हैं। हर नज़र, हर इशारा कहानी कह रहा है।