इस नाटक का अंत बहुत ही जबरदस्त है। जब नायक ने खलनायक के मुखौटे को उतारा तो सबको झटका लगा। उनकी पुरानी दुश्मनी का खुलासा देखकर रोंगटे खड़े हो गए। युद्ध कला की असली ताकत क्या है, यह संदेश बहुत गहरा है। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में ऐसे मोड़ बार-बार देखने को मिलते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। लड़ाई के दृश्यों की बनावट भी कमाल की है।
खलनायक का पात्र बहुत ही जटिल है। उसने अपनी कमजोरी को ताकत में बदलने के लिए गलत रास्ता चुना। नायक की बातें सुनकर लगा कि असली ताकत शरीर में नहीं दिल में होती है। चश्मे वाला तकनीक वाला दृश्य बहुत ही भविष्यवादी लगा। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का की कहानी में यह संघर्ष बहुत अच्छे से दिखाया गया है। अंत में होने वाली लड़ाई का बेसब्री से इंतजार है।
महिला पात्र की चुप्पी भी बहुत कुछ कह रही है। वह जानती है कि असली सच्चाई क्या है। जब खलनायक ने दवाई बनाने का जिक्र किया तो चौंक गए। क्या वास्तव में वह जीत पाएगा? यह सवाल दिमाग में घूम रहा है। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का के हर भाग में नया रहस्य मिलता है। संवाद बोलने का तरीका भी बहुत दमदार है।
नायक की युद्ध कला का पैंतरा देखकर पुरानी फिल्में याद आ गईं। उसकी आंखों में गुस्सा और ठंडक दोनों थी। खलनायक का पागलपन साफ झलक रहा था। जब उसने कहा कि मैं सबको दिखा दूंगा, तो लगा कि वह कितना टूट चुका है। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में भावनाओं का यह खेल बहुत अच्छा लगा। पृष्ठभूमि की रचना भी साधारण लेकिन प्रभावशाली है।
तकनीक बनाम परंपरा का यह युद्ध बहुत रोचक है। खलनायक को लगता है कि चश्मा उसे जीत दिला देगा, लेकिन नायक का अनुभव कुछ और ही है। यह संवाद बहुत गहरा था कि कमजोरों की रक्षा के लिए ही ताकत है। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में ऐसे दार्शनिक पहलू भी जोड़े गए हैं। दर्शक के रूप में मुझे यह विचार बहुत पसंद आया।
भूतकाल के दृश्य में जब उसने गुरु से विनती की थी, तो लगा कि शायद वह बदल सकता था। लेकिन नायक ने उसे ठुकरा दिया, जिससे यह नफरत पैदा हुई। क्या यह गलती नायक की थी? यह सवाल बहुत अहम है। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का की पटकथा में यह रंग बहुत अच्छा है। अभिनय में जान है।
लड़ाई की शुरुआत होने वाली है और माहौल बहुत तनावपूर्ण है। खलनायक के हाथ में वह नीला चश्मा बहुत अजीब लग रहा था। नायक की मुद्रा से लग रहा है कि वह किसी भी चुनौती के लिए तैयार है। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का के संघर्ष के दृश्य हमेशा यादगार होते हैं। संगीत का उपयोग भी सही जगह पर किया गया है जो रोमांच बढ़ाता है।
कहानी में बदले की आग साफ दिखाई दे रही है। खलनायक ने सालों मेहनत की है बस इसी पल के लिए। लेकिन क्या ताकत ही सब कुछ है? नायक का जवाब बहुत सटीक था। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में नैतिकता का यह पाठ बहुत प्रभावशाली लगा। किरदारों के बीच का मेल भी बहुत अच्छा बना है।
मुखौटा उतारने का दृश्य बहुत ही नाटकीय था। जैसे ही उसका चेहरा सामने आया, सब कुछ बदल गया। पुरानी पहचान का खुलासा होना किसी झटके से कम नहीं था। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में ऐसे मोड़ की उम्मीद की जा सकती है। कैमरे के कोनों ने भी इस रहस्य को बनाए रखने में मदद की है।
अंत में जब दोनों आमने-सामने हुए, तो हवा में बिजली सी दौड़ गई। खलनायक का आत्मविश्वास देखकर लगा कि वह हारा नहीं है। नायक की शांति भी डरावनी लग रही थी। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का का यह सत्र सबसे बेहतरीन साबित हो रहा है। हर पल में एक नई कहानी कही गई है।