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न्याय

सोनिया मल्होत्रा, जिन्हें कानून की रानी के नाम से जाना जाता है, एक बड़ी लॉयर हैं। वह विधायक लोकेश सिंह के लिए एक केस तैयार कर रही हैं। उधर, उनकी अपनी बेटी दीया और मम्मी रचना को उनकी ही क्लाइंट पूजा सिंह परेशान कर रही है। सोनिया अपनी असली पहचान बताती हैं, लेकिन पूजा को उन पर भरोसा नहीं होता। इसके बजाय, पूजा सोनिया और उनके पूरे परिवार को और भी बुरी तरह से बदतमीज़ी झेलने पर मजबूर कर देती है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

माँ का दर्द सबसे गहरा

न्याय के अस्पताल वाले हिस्से में माँ का चेहरा देखकर रोना आ गया। बेटी के सिर पर पट्टी और ऑक्सीजन मास्क देखकर लगता है कि कुछ बहुत बुरा हुआ है। ऑफिस वाले सीन में गुस्सा और यहाँ दर्द — दोनों ही इमोशन बहुत असली लगते हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन देखना दिल को छू जाता है।

ऑफिस का गुस्सा vs अस्पताल का सन्नाटा

न्याय में दो दुनियाएं दिखाई गई हैं — एक जहां गुस्सा और ताकत है, दूसरी जहां दर्द और खामोशी है। बाल्ड आदमी का फोन पर चिल्लाना और अस्पताल में माँ का रोना — दोनों ही सीन बहुत असरदार हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसे कॉन्ट्रास्ट देखना बहुत अच्छा लगता है।

हरी ड्रेस वाली लड़की की चिंता

न्याय में हरी ड्रेस वाली लड़की का चेहरा देखकर लगता है कि वह कुछ बहुत जरूरी बात कहना चाहती है। ऑफिस में उसकी आवाज में घबराहट और अस्पताल में माँ की आंखों में दर्द — दोनों ही इमोशन बहुत गहरे हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन देखना दिल को छू जाता है।

बेटी की चोट और माँ का दर्द

न्याय के अस्पताल वाले सीन में बेटी के सिर पर पट्टी और माँ का रोना देखकर लगता है कि कहानी बहुत दर्दनाक है। ऑफिस वाले सीन में गुस्सा और यहाँ दर्द — दोनों ही इमोशन बहुत असली लगते हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन देखना दिल को छू जाता है।

ऑफिस का तनाव और अस्पताल का सन्नाटा

न्याय में ऑफिस का तनाव और अस्पताल का सन्नाटा एक-दूसरे को काटता है। बाल्ड आदमी का गुस्सा और हरी ड्रेस वाली लड़की की चिंता देखकर लगता है कि कहानी गहरी है। अस्पताल वाले सीन में माँ का दर्द दिल छू लेता है। नेटशॉर्ट पर ऐसे इमोशनल मोड़ देखना अच्छा लगता है।

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